CBSE 10th Board Social Science Paper Analysis: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं की सोशल साइंस की परीक्षा कल देश-विदेश के विभिन्न परीक्षा सेंटर पर सफल रूप से संपन्न हो गई. इस वर्ष का प्रश्नपत्र पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण रहा. हालांकि पेपर को संतुलित बताया गया, लेकिन कई छात्रों ने इसकी लंबाई और कुछ प्रश्नों की जटिलता को लेकर चिंता जताई.
प्रश्न मुश्किल थे, कम पड़ा समय
परीक्षा के बाद केंद्रों के बाहर छात्रों के बीच पेपर की लंबाई को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली. अधिकांश छात्रों का कहना था कि प्रश्नपत्र काफी लंबा था, जिसके कारण तीन घंटे का निर्धारित समय कम महसूस हुआ. खासकर मैप वर्क और LAQ को विस्तार से लिखने में छात्रों को टाम मैनेजमेंट जैसी चुनौती का सामना करना पड़ा.
मैप के सवाल आसान थे
इतिहास के कुछ प्रश्न सीधे नहीं थे, जिससे उन्हें समझने में अधिक समय लगा. कई छात्रों का कहना था कि इतिहास के प्रश्न थोड़े घुमाकर पूछे गए थे. इससे स्टूडेंट्स उलझ गए. वहीं सोशल साइंस के सेक्शन में केस-स्टडी आधारित प्रश्नों ने छात्रों की तर्कशक्ति और समझ की अच्छी परीक्षा ली. इसके विपरीत जीयोग्राफी और इकोनॉमिक्स तुलनात्मक रूप से आसान रहे, जिससे स्टूडेंट्स को कुछ राहत मिली. मैप वाले सवाल आसान थे.
बैलेंसड पेपर था
सोशल साइंस विषय के एक्सपर्ट की मानें तो पेपर को “संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण” बताया.गया. शिक्षकों के अनुसार इस बार पेपर में सीधे सवालों की तुलना में स्थिति आधारित और एप्लिकेशन-बेस्ड प्रश्न अधिक थे. इससे स्पष्ट होता है कि CBSE अब छात्रों की केवल रटने की क्षमता के बजाय विषय की गहरी समझ को अधिक महत्व दे रहा है.
NCERT पढ़ने वालों के लिए आसान रहा पेपर
एमसीक्यू (MCQ) सेक्शन को स्कोरिंग बताया गया, हालांकि कुछ प्रश्नों के विकल्प छात्रों को भ्रमित करने वाले थे. शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से निर्धारित सिलेबस के भीतर था. उनका मानना है कि जिन छात्रों ने NCERT की किताबों को ध्यान से पढ़ा और उसमें दिए गए बॉक्स, गतिविधियों और उदाहरणों को समझा होगा, वे इस परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे.
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