20 साल का बेटा, चूल्हा-चौका और जिम्मेदारी के बीच बबीता राणा ने हासिल की सरकारी नौकरी

Success Story: बबीता राणा उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली हैं. उन्होंने 44 की उम्र में दो बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी के बाद भी सरकारी नौकरी हासिल कर ली. उनकी कहानी न सिर्फ यूपी की बल्कि देशभर की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.

Success Story: आपने कई महिलाओं की कहानी ऐसी सुनी होगी जिनकी शादी हो जाती है और उनकी पढ़ाई छूट जाती है और इसके बाद वे घर बच्चे और पति में गुम होकर रह जाती हैं. हालांकि, हमारे बीच कई ऐसे उदाहरण भी मिलेंगे जहां शादी के बाद ही महिलाएं तरक्की हासिल करती है. कुछ ऐसी ही काहनी है उत्तर प्रदेश की बबीता राणा की. 

Success Story: 44 की उम्र में हासिल की नौकरी 

बबीता राणा उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली हैं. उनकी कहानी उन महिलाओं जैसी है जिनकी पढ़ाई शादी होते ही छूट जाती है. हालांकि, बबीता उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं जो शादी के बाद कुछ करना चाहती हैं. 44 वर्षीय बबीता ने अपने पति के रिटायरमेंट के बाद अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया और यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर मुख्य सेविका की नौकरी हासिल की. 

Success Story: बबीता के दो बेटे हैं 

बबीता मूल रूप से किसान परिवार से आती हैं, उनका परिवार बागपत जिले के कंडेरा गांव रहता है. बबीता के पति प्रदीप राणा भी बागपत जनपद के ही बड़ौत के रहने वाले हैं. वह एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद काशीपुर उत्तराखंड में सूर्य रोशनी में हेड ऑफ सिक्यॉरिटी हैं. बबीता और उनके पति के दो बेटे हैं. बड़ा बेटा बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई कर रहा है.

Success Story: शादी के बाद छूट गई पढ़ाई 

वर्ष 2002 में बबीता की शादी प्रदीप से हुई थी. शादी के बाद बबीता को अपने पति के साथ बेंगलुरु जाना पड़ा, जहां उन्होंने बीएड किया. 2004 में उनके बड़े बेटे आर्यन का जन्म हुआ और अगले वर्ष दूसरे बेटे आदित्य का जन्म हुआ. ऐसे में बच्चों की जिम्मेदारी उठानी पड़ी और बबीता की पढ़ाई छूट गई. बीच-बीच में बबीता के मन में अपनी पढ़ाई पूरी करने की इच्छा जगती रहती. 

Success Story: कई बार असफल होने के बाद मिली सरकारी नौकरी

बबीता का बड़ा बेटा जब 2017 में 10वीं कक्षा में गया तो इसी दौरान उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की. बबीता ने 2018 में यूपीटेट का फॉर्म भरा लेकिन वे असफल हो गईं. 2019 में फिर से कोशिश की और परीक्षा दी. इस बार कम अंक आने के कारण मेरिट लिस्ट में नहीं आ सकीं. इसके बाद उन्होंने टीजीटी की परीक्षा दी लेकिन कोई बात नहीं बनी, जिसके बाद उन्होंने 2022 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बाल सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविका के लिए आवेदन किया. 

Success Story: बनी हजारों-लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा

कई वर्षों की मेहनत करने के बाद आखिरकार बबीता ने सफलता हासिल कर ली. बबीता अपने बच्चों के साथ पढ़ती रहती थीं. बबीता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी उम्र या परिस्थिति के दबाव में आकर अपने लक्ष्य को पाने का सपना छोड़ देते हैं. उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. 

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By Shambhavi shivani

शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं. 

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