IIT कानपुर में कैसे बदलती है ब्रांच? जानें योग्यता, नियम और पूरा प्रोसेस

IIT Kanpur Branch Change Rules: आप आईआईटी कानपुर में अपनी अलॉटेड ब्रांच बदलना चाहते हैं. जानें जरूरी CPI, सीटों का गणित और ऑनलाइन अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस.

IIT Kanpur Branch Change Rules: आईआईटी कानपुर में एडमिशन मिलना हर छात्र का सपना होता है, लेकिन कई बार स्टूडेंट्स को अपनी मनपसंद ब्रांच नहीं मिल पाती. अगर आप भी अपनी अलॉटेड ब्रांच से पूरी तरह खुश नहीं हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. IIT कानपुर अपने स्टूडेंट्स को Branch Change (ब्रांच बदलने) का एक बेहतरीन मौका देता है. आइए आईआईटी कानपुर के ऑफिशियल एकेडमिक नियमों के आधार पर ब्रांच चेंज (IIT Kanpur Branch Change Rules) के प्रोसेस को जानते हैं. 

IIT Kanpur Branch Change Eligibility: मौका कब और किसे मिलता है?

आईआईटी कानपुर में ब्रांच चेंज करने की विंडो आपके पहले साल (First Year) की पढ़ाई खत्म होने के बाद खुलती है. यानी जब आप अपने पहले और दूसरे सेमेस्टर के एग्जाम्स दे चुके होते हैं, तब समर वेकेशन के दौरान इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अप्लाई करना होता है. यह मौका सिर्फ उन BTech और BS स्टूडेंट्स को मिलता है जिन्होंने अपने पहले साल के सभी कंपलसरी कोर्सेज बिना किसी बैकलॉग, फेलियर या विड्रॉल के पूरे किए हों. 

IIT Kanpur Branch Change Rules: इसके लिए सबसे जरूरी क्या है?

ब्रांच चेंज पूरी तरह से आपकी एकेडमिक परफॉर्मेंस पर निर्भर करती है. इसके लिए सबसे बड़ा पैमाना है आपका CPI (कम्युलेटिव परफॉर्मेंस इंडेक्स), जिसे आप आसान भाषा में कॉलेज के ‘पॉइंट्स’ या ग्रेड कह सकते हैं. 

  • मिनिमम एलिजिबिलिटी: किसी भी दूसरी ब्रांच के लिए आवेदन करने के लिए आपका फर्स्ट ईयर का CPI कम से कम 8.0 या उससे ऊपर होना चाहिए. (आरक्षित वर्गों के लिए इसमें नियमों के अनुसार थोड़ी छूट का प्रावधान होता है). 
  • टॉप ब्रांचेस की रेस: कंप्यूटर साइंस (CSE) या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) जैसी डिमांडिंग ब्रांचेस के लिए कंपटीशन बहुत टफ होता है. यहां सीट पाने के लिए कई बार 9.5 से लेकर 10.0 तक की परफेक्ट CPI की जरूरत पड़ जाती है. 

सीटों का गणित: 10% का कैप और लॉस का नियम

IIT कानपुर के एकेडमिक नियमों के अनुसार, आप अपनी मर्जी से किसी भी ब्रांच में तब तक नहीं जा सकते, जब तक वहां सीटें खाली न हों. इसके दो सबसे महत्वपूर्ण नियम हैं:

10% का कैप: किसी भी ब्रांच की जो ओरिजिनल ताकत है, उसमें ब्रांच चेंज के जरिए 10% से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो सकती. यानी अगर CSE में 100 सीटें हैं, तो बाहर से सिर्फ 10 बच्चे ही आ सकते हैं. 

लॉस का नियम: इसी तरह, किसी भी लोअर या मिडिल ब्रांच से 10% से ज्यादा बच्चे बाहर नहीं जा सकते. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी ब्रांच पूरी तरह से खाली न हो जाए. 

IIT Kanpur Branch Change Rules: ब्रांच चेंज का पूरा प्रोसेस 

स्टेप 1 (एप्लिकेशन): सेकंड सेमेस्टर का ऑफिशियल रिजल्ट आने के बाद एकेडमिक सेक्शन एक फॉर्म जारी करता है. इसमें आपको अपनी पसंद की ब्रांचेस की प्रायोरिटी लिस्ट (Preference List) ऑनलाइन लॉक करनी होती है.

स्टेप 2 (मेरिट लिस्ट): कंप्यूटर सिस्टम सभी आवेदकों को उनके फर्स्ट ईयर के CPI के आधार पर शॉर्टलिस्ट करता है. बराबर CPI होने पर जेईई एडवांस्ड की रैंक को टाई-ब्रेकर माना जाता है.

स्टेप 3 (सीट अलॉटमेंट): जिसकी CPI सबसे ज्यादा होगी, उसे उसकी पहली पसंद की ब्रांच पहले मिलेगी. अगर वहां सीटें फुल हो जाती हैं, तो मेरिट लिस्ट में नीचे वाले स्टूडेंट्स को उनकी अगली पसंद की ब्रांच दी जाती है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Smita Dey

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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