Electrical vs Electronics Engineering: करियर चुनने की बारी आती है, तो 12वीं और JEE के बाद सबसे बड़ा कन्फ्यूजन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ECE) के बीच होता है. नाम सुनने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन दोनों की दुनिया और काम करने का तरीका काफी अलग है. अगर आप भी इस उलझन में हैं कि किसमें स्कोप ज्यादा है और आपको क्या चुनना चाहिए, तो आइए जानते हैं.
Electrical vs Electronics Engineering: दोनों ब्रांच में फर्क क्या है?
Electrical Engineering: इसमें आप भारी-भरकम बिजली बनाने (Power Generation), उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने और बड़ी मशीनों (जैसे मोटर्स, ट्रांसफॉर्मर) के बारे में पढ़ते हैं. यह बड़े पावर प्लांट और ग्रिड से जुड़ा है.
Electronics Engineering: इसमें आप कम वोल्टेज और छोटे कंपोनेंट्स (जैसे माइक्रोचिप, प्रोसेसर, डायोड, ट्रांजिस्टर) के बारे में पढ़ते हैं. आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी इसी की देन हैं.
Electrical vs Electronics Engineering: सैलरी और पैकेज
अगर शुरुआती पैकेज की बात करें, तो इलेक्ट्रॉनिक्स के छात्रों को IT और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की वजह से प्राइवेट सेक्टर में हाई पैकेज (15 से 25 लाख) मिलते हैं. दूसरी ओर, इलेक्ट्रिकल में शुरुआत में पैकेज लगभग 3.5 लाख से 6 लाख रुपये प्रति महीने हो सकता है, लेकिन सरकारी नौकरी की सुरक्षा और EV सेक्टर के आने से अब प्राइवेट में भी इनके पैकेज काफी शानदार होने लगे हैं.
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में क्या स्कोप है?
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक ‘एवरग्रीन’ (सदाबहार) ब्रांच है. जब तक दुनिया में बिजली रहेगी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की जरूरत बनी रहेगी.
- सरकारी नौकरियां (PSUs): सरकारी सेक्टर में इलेक्ट्रिकल का दबदबा है. PGCIL, NTPC, BHEL, ONGC, इंडियन रेलवे और स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में हर साल भारी संख्या में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की भर्ती होती है.
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रिवॉल्यूशन: आज की तारीख में इलेक्ट्रिकल का सबसे बड़ा बूम EV सेक्टर (Tesla, Tata Motors, Ola Electric) में है. बैटरी मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिक मोटर डिजाइन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की डिमांड बढ़ रही है.
- रिन्यूएबल एनर्जी: सोलर और विंड एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) के क्षेत्र में भी इनका स्कोप तेजी से बढ़ रहा है.
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में क्या स्कोप है?
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग आज के डिजिटल और टेक युग की रीढ़ की हड्डी है. इसमें स्कोप का दायरा बहुत बड़ा और मॉडर्न है.
- चिप डिजाइनिंग और VLSI: आजकल हर डिवाइस को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए चिप की जरूरत होती है. VLSI इंडस्ट्री में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स को करोड़ों के पैकेज मिलते हैं. Intel, Qualcomm, AMD, NVIDIA जैसी कंपनियां इनके लिए टॉप रिक्रूटर्स हैं.
- IT और सॉफ्टवेयर सेक्टर: इलेक्ट्रॉनिक्स के छात्रों को कोडिंग और सॉफ्टवेयर का भी अच्छा नॉलेज होता है. इसलिए TCS, Infosys जैसी IT कंपनियों से लेकर Google, Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों में भी ये आसानी से प्लेसमेंट पा लेते हैं.
- IoT, AI और रोबोटिक्स: आने वाला समय इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स का है. इन सभी फील्ड्स में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को जोड़ने का काम इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स ही करते हैं.
Electrical vs Electronics Engineering: आपके लिए कौन सा बेहतर है?
आपको बड़ी मशीनें पसंद हैं, पावर ग्रिड कैसे काम करता है यह जानना है, EV टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी है या आपका मुख्य टारगेट सरकारी नौकरी (GATE/PSUs) है, तो इलेक्ट्रिकल ब्रांच आछ हो सकता है. वहीं अगर आपको गैजेट्स, मोबाइल, कंप्यूटर चिप्स, कोडिंग, और रोबोटिक्स पसंद हैं, और आप प्राइवेट सेक्टर या टेक कंपनियों में मोटी सैलरी वाला कॉर्पोरेट करियर चाहते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग ब्रांच सही रहेगा.
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