DElEd vs BEd Best Course: 12वीं के बाद जो स्टूडेंट्स टीचिंग लाइन में करियर बनाना चाहते हैं, उनके सामने सबसे पहला सवाल यही आता है कि डीएलएड करें या बीएड. दोनों कोर्स टीचर बनने का रास्ता तो खोलते हैं, लेकिन दोनों में काफी फर्क है. अगर आप भी कन्फ्यूज हैं कि किस कोर्स में एडमिशन लें, तो यहां पूरी बात आसान भाषा में समझते हैं.
डीएलएड vs बीएड
| पॉइंट | डीएलएड | बीएड |
| कोर्स लेवल | डिप्लोमा | ग्रेजुएशन के बाद डिग्री |
| एलिजिबिलिटी | बारहवीं पास | किसी भी विषय में ग्रेजुएशन |
| कोर्स की अवधि | 2 साल | 2 साल |
| फीस | अपेक्षाकृत कम | थोड़ी ज्यादा |
| किसे पढ़ा सकते हैं | क्लास 1 से 5 (प्राइमरी) | क्लास 6 से 12 (अपर प्राइमरी व सेकेंडरी) |
| करियर स्कोप | प्राइमरी टीचर, सरकारी वैकेंसी जल्दी | स्कूल, कोचिंग, हायर एजुकेशन तक स्कोप |
| किसके लिए बेहतर | जल्दी नौकरी चाहने वालों के लिए | ग्रेजुएशन के बाद टीचिंग करियर बनाने वालों के लिए |
डीएलएड क्या होता है?
डीएलएड यानी डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन एक दो साल का कोर्स है जो बारहवीं के तुरंत बाद किया जा सकता है. यह कोर्स खासतौर पर प्राइमरी यानी छोटी क्लास के बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार करता है. इसमें फीस भी कम लगती है और कोर्स की अवधि भी छोटी होती है, इसलिए जो स्टूडेंट्स जल्दी टीचिंग लाइन में आना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा ऑप्शन माना जाता है.
बीएड क्या होता है?
बीएड यानी बैचलर ऑफ एजुकेशन एक ग्रेजुएशन लेवल का कोर्स है जिसे करने के लिए पहले किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पूरा होना जरूरी है. यह कोर्स दो साल का होता है और इसमें सेकेंडरी यानी बड़ी क्लास के बच्चों को पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है. बीएड करने वाले स्टूडेंट्स स्कूल के साथ-साथ कोचिंग और हायर एजुकेशन सेक्टर में भी मौका तलाश सकते हैं.
DElEd vs BEd Best Course: एलिजिबिलिटी में फर्क
डीएलएड के लिए सिर्फ बारहवीं पास होना काफी है, जबकि बीएड के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है. यानी अगर कोई स्टूडेंट जल्दी टीचिंग शुरू करना चाहता है तो डीएलएड सीधा रास्ता है, लेकिन बीएड के लिए पहले तीन साल ग्रेजुएशन में लगाने होंगे.
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किसमें मिलती है कौन सी नौकरी?
डीएलएड करने वाले कैंडिडेट प्राइमरी टीचर यानी क्लास एक से पांच तक पढ़ाने के लिए योग्य होते हैं. वहीं बीएड करने वाले कैंडिडेट अपर प्राइमरी और सेकेंडरी यानी क्लास छह से बारह तक पढ़ाने के लिए एलिजिबल होते हैं. सरकारी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भी इसी हिसाब से पोस्ट तय होती है.
सैलरी और स्कोप में अंतर
आमतौर पर सेकेंडरी टीचर की सैलरी प्राइमरी टीचर से थोड़ी ज्यादा होती है, इसलिए बीएड करने वालों को शुरुआती दौर में सैलरी के मामले में थोड़ा फायदा मिल सकता है. लेकिन डीएलएड वाले भी सरकारी वैकेंसी जल्दी क्लियर करके स्थायी नौकरी पा सकते हैं, क्योंकि प्राइमरी टीचर की वैकेंसी काफी संख्या में निकलती रहती है.
कौन सा कोर्स है ज्यादा फायदेमंद?
अगर आपका फोकस जल्दी नौकरी पाने पर है और पढ़ाई का बजट भी सीमित है, तो डीएलएड बेहतर ऑप्शन हो सकता है. वहीं अगर आप ग्रेजुएशन के बाद टीचिंग में करियर बनाना चाहते हैं और बड़ी क्लास पढ़ाने में दिलचस्पी रखते हैं, तो बीएड आपके लिए सही रहेगा. दोनों कोर्स अपनी जगह सही हैं, बस स्टूडेंट को अपनी परिस्थिति और लक्ष्य के हिसाब से फैसला लेना चाहिए.
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