BPSC Topper Success Mantra: मध्य प्रदेश की आस्था दमेले (Astha Damele) ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 23वीं रैंक हासिल करके अपनी मेहनत की मिसाल पेश की है. एमपी के पलेरा तहसील की रहने वाली आस्था ने करीब 21-22 परीक्षा दी हैं, जिसमें से सिर्फ 7-8 में वे पास हो पाईं. उन्होंने करीब 5 सालों की मेहनत के बाद ये सफलता हासिल की है. ऐसे में आइए, जानते हैं उनकी स्ट्रैटजी (BPSC Exam Strategy) क्या थी और इतने लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने कैसे सफलता पाई.
BPSC Topper रोज रात करती थीं ये काम
आस्था ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि वह हर रात सोने से पहले अगले दिन की पढ़ाई का पूरा प्लान लिखकर रखती थीं. इससे सुबह उठते ही उन्हें पता होता था कि क्या पढ़ना है और समय कैसे इस्तेमाल करना है. इसके अलावा वह नियमित मेडिटेशन भी करती थीं. उनका मानना है कि सिविल सेवा जैसी लंबी तैयारी में मेंटल हेल्थ उतनी ही जरूरी है, जितनी पढ़ाई.
BPSC की तैयारी करने वालों को क्या सलाह देती हैं आस्था
आस्था का कहना है कि BPSCऔर दूसरी सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रीलिम्स सिर्फ क्वालिफाइंग होता है, इसलिए मेन्स पर ज्यादा फोकस करना चाहिए. कम स्टडी मटेरियल रखें, लेकिन उसे कई बार पढ़ें. सबसे जरूरी है आंसर लिखने की रेगुलर प्रैक्टिस. उनका मानना है कि सीमित सोर्स और लगातार रिवीजन ही सफलता की सबसे मजबूत स्ट्रैटजी है.
छोटे से गांव से हुई शुरुआत
आस्था का बचपन एक छोटे से गांव में बीता, जहां अच्छी शिक्षा की सुविधाएं नहीं थीं. लेकिन उनकी मां ने शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने देंगी. यही वजह रही कि आस्था को आगे की पढ़ाई के लिए छतरपुर भेजा गया. 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने वहीं से पूरी की और शुरू से ही पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन किया.
12वीं की टॉपर छात्रा, लेकिन सफर आसान नहीं था
आस्था स्कूल के दिनों से ही हाई स्कोरिंग स्टूडेंट रही हैं. अच्छे मार्क्स लाने के बावजूद आस्था के लिए आगे का रास्ता मुश्किल होने वाला था. साल 2021 में उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की. उनका पहला सपना UPSC था, लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अलग-अलग राज्यों की लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं भी देना जारी रखा.
21 परीक्षाएं दीं, लेकिन हार को कभी आखिरी मंजिल नहीं माना
आस्था की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने कुल 21 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. इनमें से केवल 7 से 8 परीक्षाओं में ही सफलता मिली. कई बार रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं आया. दो बार UPPSC प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हो पाया. लेकिन उन्होंने हर असफलता को सीख की तरह लिया. जब बिहार में BPSC की भर्ती निकली तो उन्होंने परीक्षा दी और इंटरव्यू तक पहुंचीं. आखिरकार यही परीक्षा उनके लिए सफलता का दरवाजा बन गई.
जब खुद पर होने लगा था डाउट
लगातार पांच साल तक तैयारी करते-करते एक समय ऐसा भी आया, जब आस्था को खुद पर शक होने लगा था. बार-बार की असफलताओं ने आत्मविश्वास जरूर डगमगाया, लेकिन परिवार ने उन्हें टूटने नहीं दिया. उनका भाई हमेशा कहता था, "तुम रोज पढ़ रही हो, यही तुम्हारी असली सफलता है." वहीं उनके पिता की एक सीख हमेशा उनके साथ रही, "मेहनत करो, फल की चिंता मत करो." परिवार के इन्हीं शब्दों ने उन्हें फिर से मजबूत बना दिया.
परीक्षा जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं
आस्था ने कहा कि किसी भी परीक्षा को अपनी पूरी जिंदगी नहीं बना लेना चाहिए. वह कहती हैं कि खुद को एक तय समय दें और पूरी मेहनत करें, लेकिन जिंदगी को सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित न रखें.
बीच -बीच में अपनी मेहनत को सेलेब्रेट कीजिए. दूसरों से तुलना में मत करिए. एक दो दोस्त UPSC, BPSC से बाहर के सर्कल के रखिए ताकि आपको लगे कि सिर्फ यही जिंदगी नहीं है. नेगेटिव दोस्तों या लोगों के घेरे में मत रहिए. खुद पर विश्वास रखिए. एक दिन मेहनत जरूर सफलता देती है.
