AI In CBSE Syllabus: किसी सवाल का जवाब नहीं आया तो अब बच्चे किताब के पन्ने पलटने के बजाय AI से पूछ सकते हैं. कुछ ही सेकेंड में जवाब सामने भी आ जाएगा. लेकिन असली सवाल इसके बाद शुरू होता है, क्या बच्चा यह भी समझ पाएगा कि AI ने जो जवाब दिया है, वह सही है या गलत?
स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती एंट्री ने पढ़ाई का तरीका बदलना शुरू कर दिया है. CBSE ने 2026-27 सत्र से स्कूल में कंप्यूटेशनल थीकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से को स्कूल के सिलेबस के साथ जोड़ा है. हालांकि कक्षा 3 से 5 में मुख्य जोर Computational Thinking पर है, जबकि कक्षा 6 से 8 में AI literacy को ज्यादा स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. सिलेबस का उद्देश्य बच्चों को केवल टेक्निकल इस्तेमाल करना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समस्या को समझने और टेक्नोलॉजी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना है.
AI से जवाब लेना आसान, उसकी जांच करना असली हुनर
मान लीजिए, कक्षा 6 का एक बच्चा किसी सब्जेक्ट पर प्रोजेक्ट बना रहा है. उसने AI से पूछा और उसे पूरा जवाब मिल गया. अगर बच्चा उसे बिना जांचे अपनी कॉपी में लिख देता है, तो उसने AI का इस्तेमाल तो कर लिया, लेकिन AI literacy नहीं सीखी.
यही वजह है कि आने वाले समय में स्कूलों के सामने एक नई चुनौती होगी. बच्चों को यह सिखाना होगा कि AI का जवाब फाइनल सच नहीं है. उसमें गलती हो सकती है, जानकारी अधूरी हो सकती है या किसी विषय को एकतरफा तरीके से पेश किया जा सकता है.
CBSE के नए सिलेबस में भी क्रिटिकल थीकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, एथिकल रिजनिंग और रिस्पॉन्सिब्ल यूज ऑफ टेक्नोलॉजी पर जोर दिया गया है यानी बच्चे को सिर्फ यह पता होना काफी नहीं होगा कि AI से सवाल कैसे पूछा जाए. उसे यह भी समझना होगा कि मिले हुए जवाब की जांच कैसे की जाए.
यानी बच्चे को सिर्फ यह पता होना काफी नहीं होगा कि AI से सवाल कैसे पूछा जाए. उसे यह भी समझना होगा कि मिले हुए जवाब की जांच कैसे की जाए.
कक्षा 3 से 5 के बच्चों के लिए कंप्यूटेशनल थीकिंग को मैथ्स और The World Around Us जैसे विषयों के साथ जोड़ा गया है. इसमें pattern पहचानना, logical thinking और किसी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसका समाधान निकालना जैसी गतिविधियां शामिल हैं.
कक्षा 6 से 8 में यह सीख और आगे बढ़ती है. यहां बच्चों को AI, data और technology के इस्तेमाल के साथ उसके एथिकल पहलूओं से भी परिचित कराया जाएगा. यानी बच्चे धीरे-धीरे यह समझने की तरफ बढ़ेंगे कि तकनीक हमारे फैसलों को कैसे प्रभावित करती है और उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल क्यों जरूरी है.
आने वाले समय की नई परीक्षा - AI को कितना समझते हैं बच्चे
स्कूलों में AI literacy की परीक्षा सिर्फ लिखित सवालों से नहीं होगी. एक बच्चे के सामने AI का गलत जवाब रखकर पूछा जा सकता है कि इसमें गलती कहां है. किसी जवाब के साथ स्रोत न दिया गया हो तो बच्चे से पूछा जा सकता है कि वह जानकारी को verify कैसे करेगा.
इसी तरह AI के बनाए दो अलग-अलग जवाब देकर यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि बच्चा उनमें मौजूद bias को पहचान पाता है या नहीं. यानी आने वाले समय में सवाल कुछ ऐसा हो सकता है - “AI से जवाब निकालो” नहीं, बल्कि “AI के जवाब को परखकर बताओ कि इसमें कितना भरोसा किया जा सकता है.”
शिक्षक के सामने भी बदल रही है जिम्मेदारी
AI literacy सिर्फ बच्चों के लिए नई चुनौती नहीं है. शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है. अब शिक्षक को यह समझना होगा कि बच्चों को AI टूल चलाने के साथ-साथ उसकी सीमाओं के बारे में कैसे बताया जाए.
CBSE ने 2026-27 के लिए कंप्यूटेशनल थीकिंग और एआई अंडस्टैंडिंग को ट्रेनिंग थीम के रूप में भी शामिल किया है. शिक्षक प्रशिक्षण में AI readiness, classroom implementation और Ethics and Responsible Use of AI जैसे पहलुओं पर जोर दिया जा रहा है.
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में शिक्षक सिर्फ यह नहीं बताएंगे कि AI क्या कर सकता है. उन्हें यह भी समझाना होगा कि AI पर कब भरोसा नहीं करना चाहिए.
हर स्कूल में AI की पहुंच एक जैसी नहीं
एआई एजुकेशन की सबसे बड़ी चुनौती पैसा भी है. देश के सभी स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट और ट्रेंड की स्थिति एक जैसी नहीं है. UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश के करीब 64.7 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर फैसिलिटी और 63.5 फीसदी स्कूलों में इंटरनेट फैसिलिटी उपलब्ध थी.
ऐसे में सवाल सिर्फ सिलेबस लागू करने का नहीं है. सवाल यह भी है कि क्या हर बच्चे को AI और डिजिटल टूल्स के साथ प्रैक्टिल लर्निंग का समान मौका मिलेगा?
खासकर छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों में यह अंतर ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. जिस बच्चे के स्कूल में पर्याप्त कंप्यूटर्स या ट्रेंड टीचर्स नहीं हैं, उसके लिए AI literacy की पढ़ाई सिर्फ किताब तक सीमित रह जाने का खतरा है.
असली बदलाव AI पढ़ाने में नहीं, AI पर सवाल करना सिखाने में होगा
AI आने वाले समय में बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा जरूर बनेगा. लेकिन स्कूलों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह तय करना होगी कि बच्चे AI के उपभोक्ता बनें या समझदार उपयोगकर्ता.
एक बच्चा AI से कविता लिखवा सकता है, गणित का सवाल पूछ सकता है या किसी विषय की जानकारी ले सकता है. लेकिन अगर वह जवाब देखकर अगला सवाल पूछना सीख गया - “इसकी जानकारी कहां से आई?”, “क्या यह सही है?” और “क्या मुझे इसे खुद verify करना चाहिए?” - तभी उसकी AI literacy मजबूत मानी जाएगी.
शायद आने वाले समय में स्कूल की सबसे जरूरी परीक्षा यही होगी कि बच्चा AI से कितना काम करवा सकता है, इससे ज्यादा यह कि AI के काम को वह कितनी समझदारी से परख सकता है.
ये भी पढ़ें: 20 स्टूडेंट्स की बल्ले-बल्ले, Google Microsoft में मिला प्लेसमेंट, 1.2 करोड़ का पैकेज देकर छा गया ये कॉलेज
