How to Become High Court Judge: भारत में कैसे बनते हैं हाईकोर्ट का जज? इस बड़ी परीक्षा को पास करना है जरूरी

High Court Judge Kaise Bane: वकील और जज का पेशा सम्मानजनक पेशा माना जाता है. कई सारे युवा चाहते हैं कि वे सीनियर जज बनें. लेकिन ये इतना आसाना नहीं. इसके लिए लॉ की डिग्री हासिल करनी होती है और कई सारी परीक्षाएं पास करनी होती है. आइए, जानते हैं हाई कोर्ट का जज कैसे बनते हैं-

How to Become High Court Judge: न्यायपालिका एक ऐसा क्षेत्र है जो युवाओं को काफी आकर्षित करता है. कई युवा हैं जो 12वीं के बाद हाईकोर्ट में जज बनना चाहते हैं. लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई लोग जज नहीं बन पाते हैं. जज बनने के लिए लॉ की पढ़ाई करनी होती है, कई सारी परीक्षाएं देनी होती हैं और एक लंबा सफर तय करना होता है. आइए, जानते हैं कि हाईकोर्ट में जज बनने के लिए क्या करना होता है- 

How to Become High Court Judge: 12वीं के बाद हासिल करें डिग्री 

एडवोकेट या जज बनने के लिए सबसे जरूरी है लॉ की डिग्री हासिल करना. लॉ की डिग्री दो तरह की होती है, एक 12वीं के बाद और दूसरा ग्रेजुएशन के बाद. 12वीं के बाद 5 साल का इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स (जैसे BA LLB या BBA LLB) कर सकते हैं, जिसमें स्नातक की डिग्री और लॉ की डिग्री दोनों शामिल होती हैं. ग्रेजुएशन के बाद 3 साल का LLB कोर्स कर सकते हैं. लॉ कॉलेज में दाखिला के लिए सभी को CLAT परीक्षा पास करनी होती है. 

High Court Judge Kaise Bane: ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा पास करें 

लॉ की पढ़ाई के बाद जज बनने के लिए संबंधित राज्य की ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम (Judicial Services Exam) को पास करना होता है. इस परीक्षा का आयोजन हाईकोर्ट या राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है. ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम एक कठिन परीक्षा होती है, जिसमें तीन चरण होते हैं. प्रीलिम्स एग्जाम, मेन एग्जाम और इंटरव्यू, इन तीनों चरणों को पास करना वाला उम्मीदवार ही अंतिम रूप से सफल माना जाएगा और उसे जिला न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के पद पर नियुक्त किया जाएगा. 

How to Become High Court Judge: 3-5 सालों का अनुभव जरूरी है

ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा पास करने के बाद जिला न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में 3-5 सालों का अनुभव लेना जरूरी है. इसके बाद आप सीनियर जज बन सकते हैं. इसके बाद हाईकोर्ट के जज बनने के लिए आवेदन करने का मौका मिलता है. भारत में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति उनके कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर होती है. जजों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति की होती है. 

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