Moody’s Report: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के लिए एक चिंताजनक खबर है. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.8% से घटाकर 6% कर दिया है. इसका सीधा कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष है. मूडीज की चेतावनी साफ है: अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो भारत में न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि रसोई गैस (LPG) और खाने-पीने की चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ेंगे.
मूडीज की रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें
- ग्रोथ में गिरावट: भारत की जीडीपी वृद्धि दर अब 6.8% के बजाय 6% रहने का अनुमान है.
- महंगाई : मूडीज का मानना है कि औसत महंगाई दर पिछले साल के 2.4% से बढ़कर 4.8% (लगभग दोगुनी) हो सकती है.
- ब्याज दरों: महंगाई बढ़ने के खतरे को देखते हुए RBI शायद ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती न करे, या इन्हें धीरे-धीरे बढ़ा दे. यानी आपकी EMI कम होने के आसार कम हैं.
- रेमिटेंस: विदेश से भारतीय जो पैसा घर भेजते हैं, उसका 40% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. युद्ध के कारण इस आवक पर बुरा असर पड़ेगा.
- खाद्य सुरक्षा का संकट: भारत खाद (Fertilizer) के लिए आयात पर निर्भर है. सप्लाई रुकने से खेती की लागत बढ़ेगी और अनाज महंगा होगा.
हम खाड़ी देशों पर इतने निर्भर क्यों हैं?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़ा है, यही वजह है कि वहां का तनाव हमारी रसोई और सड़कों तक पहुंचता है.
कच्चा तेल (Crude Oil): भारत अपनी जरूरत का 55% तेल इसी क्षेत्र से मंगाता है.
रसोई गैस (LPG): हमारी 90% से ज्यादा एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों पर टिकी है.
अन्य एजेंसियों के अनुमान
| एजेंसी | 2026-27 के लिए GDP अनुमान |
| मूडीज (Moody’s) | 6% (पहले 6.8% था) |
| OECD | 6.1% |
| इक्रा (ICRA) | 6.5% |
| EY (इकॉनमी वॉच) | 1% की गिरावट (अगर युद्ध जारी रहा) |
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