अमेरिका ने अपने Visa Bond Program को अब स्थायी नियम बना दिया है. इसके तहत कुछ देशों के नागरिकों को B-1 (बिजनेस) और B-2 (टूरिस्ट) वीजा मिलने से पहले रिफंडेबल सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है. हालांकि राहत की बात यह है कि भारत इस कार्यक्रम में शामिल नहीं है, इसलिए भारतीय आवेदकों पर फिलहाल इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
किन लोगों को देना होगा Visa Bond?
यह नियम उन 50 देशों के नागरिकों पर लागू होगा जो B-1 और B-2 वीजा के लिए आवेदन करते हैं. नए नियम के तहत पात्र आवेदकों से 20,000 डॉलर तक का रिफंडेबल बॉन्ड जमा कराया जा सकता है. अगर आवेदक वीजा की सभी शर्तों का पालन करता है और तय समय के भीतर अमेरिका छोड़ देता है, तो पूरी राशि वापस कर दी जाएगी. वहीं, अगर वीजा आवेदन ही खारिज हो जाता है, तब भी जमा किया गया बॉन्ड लौटा दिया जाएगा.
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय नागरिकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि भारत इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है. यानी भारत से B-1 या B-2 वीजा के लिए आवेदन करने वालों को इस नए बॉन्ड नियम के तहत कोई अतिरिक्त राशि जमा नहीं करनी होगी. हालांकि यह फैसला दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन अब वीजा ओवरस्टे (वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुकना) को रोकने के लिए पहले से ज्यादा सख्त कदम उठा रहा है.
पहले क्या नियम था और अब क्या बदला?
पहले चलाए गए पायलट प्रोग्राम में कॉन्सुलर अधिकारी 5,000 डॉलर, 10,000 डॉलर या अधिकतम 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड तय कर सकते थे. अब नए स्थायी नियम में 5,000 डॉलर का विकल्प हटा दिया गया है और अधिकतम बॉन्ड राशि बढ़ाकर 20,000 डॉलर कर दी गई है. यह कार्यक्रम ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल अगस्त में शुरू किया था. इसका मकसद वीजा अवधि खत्म होने के बाद अमेरिका में रुकने वाले लोगों की संख्या कम करना और इमिग्रेशन नियमों को सख्ती से लागू करना था.
इस फैसले के पीछे क्या वजह है?
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, कार्यक्रम में शामिल 50 देशों के करीब 45,500 लोग वर्ष 2024 में वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुके रहे. वहीं, पायलट प्रोग्राम के पहले 10 महीनों में जिन लोगों पर बॉन्ड नियम लागू हुआ, उनमें 50 से भी कम मामलों में वीजा ओवरस्टे दर्ज किया गया.
विभाग का कहना है कि यह नियम B-1/B-2 वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को कम करने में मदद करेगा. हालांकि आलोचकों का मानना है कि इससे विकासशील देशों के यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.
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