फ्री में नहीं होगा UPI से पौसों का लेन देन! सरकार ने ऑनलाइन पेमेंट को लेकर दूर किया कनफ्यूजन, जानें नया नियम

UPI Transaction New Rule : क्या UPI से पैसे भेजने पर टैक्स लगेगा? सरकार ने ₹2000 तक के UPI पेमेंट पर कोई भी शुल्क न लेने का ऐलान किया है. जानिए इस नए नियम का आम ग्राहक पर क्या असर होगा.

क्या UPI से पैसों का लेन-देन करने पर सरकार को टैक्स देना होगा. इस सवाल का जवाब सरकार ने साफ कर दिया है. सोमवार को देर रात सरकार ने अधिसूचना जारी कर कहा कि है कि ₹2000 तक UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. पहले नियम था किसी भी UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. हालांकि ₹2000 से ज्यादा पेमेंट पर कितना चार्ज लगाना है इसका फैसला नहीं हुआ है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इसका रेट 0.3 से 0.5% होने का अनुमान है.

UPI से पेमेंट करने पर सरकार ने क्या नया नियम लागू किया है

  • नए नियम के तहत, अगर आप किसी दुकान पर 500, 1,000 या 2,000 रुपये का भुगतान यूपीआई के जरिए करते हैं, तो इस लेनदेन के लिए आपसे अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता. यही नियम 2,000 रुपये तक के रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर भी लागू होगा.
  • वित्त मंत्रालय की राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, बैंक और पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर ऐसे भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं ले सकते. यानी ग्राहक के स्तर पर इस तरह के भुगतान को लेकर कोई नया चार्ज नहीं लगाया जा सकता.

सरकार ने नए नियम के लिए राजपत्र अधिसूचना क्यों जारी किया है

  • दरअसल, यूपीआई पर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी (MDR) लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर हाल में काफी चर्चा हुई थी.
  • इसी वजह से आम ग्राहकों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि क्या यूपीआई से भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा.
  • सरकार का राजपत्र अधिसूचना का मकसद इसी भ्रम को दूर करना है. सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह व्यवस्था स्पष्ट की है.

क्या हर UPI ट्रांजैक्शन या ऑनलाइन पेमेंट फ्री रहेगा?

  • नए नियम के अनुसार अभी हर मर्चेंट UPI पेमेंट पर चार्ज नहीं लगने वाला है. सरकार ने सिर्फ ₹2000 तक UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगने की बात कही है.
  • लेकिन सरकार के मुताबिक, अगर भविष्य में एमडीआर लागू किया जाता है, तो यह कुछ खास श्रेणी के मर्चेंट लेनदेन और एक तय सीमा से अधिक राशि वाले भुगतान तक सीमित हो सकता है.
  • यानी भविष्य में एमडीआर लागू होने पर आपको एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ सकते हैं. इसके अलावा सरकार ने P2P भुगतान को लेकर कुछ नहीं कहा है.

P2P और मर्चेंट भुगतान में क्या अंतर है?

ऑनलाइन पेमेंट या UPI से पेमेंट को सरकार ने दो कैटेगरी में बांटा है. इसे समझने के लिए P2P और मर्चेंट पेमेंट का फर्क जानना जरूरी है.

P2P पेमेंट क्या होता है

P2P यानी व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान तब होता है, जब आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दूसरे व्यक्ति के यूपीआई खाते में सीधे पैसे भेजते हैं. उदाहरण के लिए, आपने अपने दोस्त को 1,000 रुपये भेजे या घर के किसी सदस्य को पैसे ट्रांसफर किए, तो यह P2P भुगतान है.

मर्चेंट पेमेंट क्या होता है

मर्चेंट भुगतान तब होता है, जब आप किसी दुकान, कंपनी या कारोबारी को सामान या सेवा के बदले यूपीआई से पैसे देते हैं. जैसे किराना दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करके 500 रुपये देना, रेस्टोरेंट का बिल यूपीआई से चुकाना या किसी ऑनलाइन स्टोर पर यूपीआई से भुगतान करना मर्चेंट लेनदेन माना जाता है.

आम UPI यूजर के लिए इसका क्या मतलब है?

  • आम ग्राहक के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर ग्राहक से कोई शुल्क नहीं ले सकते.
  • यानी अगर आप किसी दुकान से 800 रुपये का सामान खरीदते हैं, रेस्टोरेंट का 1,500 रुपये का बिल यूपीआई से चुकाते हैं या किसी व्यक्ति को 2,000 रुपये तक भेजते हैं, तो इस भुगतान के लिए आपसे अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जा सकता. 

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By गौतम कुमार

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