UPI पेमेंट को लेकर सरकार ने नया नियम जारी किया है. जिसके को लेकर कई लोगों के मन में ये डर है कि अब डिजिटल पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा पैसे कटेंगे? लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है. दरअसल, नए नियम में UPI से पेमेंट करने वालों के लिए राहत की बात ये है कि व्यक्ति से व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पर कोई MDR नहीं लगेगा. नए नियम के अनुसार Google Pay, PhonePe और Paytm से पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा पैसे तो देने होंगे लेकिन आपको अपनी जेब से नहीं 1 रुपया नहीं देना पडे़गा. कैसे? समझते हैं इस लेख में.
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR सिस्टम
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए पेमेंट करने के तरीके में जल्द एक अहम बदलाव होने वाला है.
- सरकार ने यूपीआई के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर तय किया है. यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी.
- सबसे अहम बात यह है कि आम लोगों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.
- यानी आप अपने दोस्त, परिवार के किसी सदस्य या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI से कितनी भी रकम भेजें, उस पर MDR नहीं देना होगा.
MDR (Merchant Discount Rate) वह एक्स्ट्रा फीस होती है, जो कोई मर्चेंट यानी दुकानदार अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों (जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay) को देता है. सरकार ने जनवरी 2020 में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए UPI पर MDR खत्म कर दिया था. लेकिन अब नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से MDR को दोबारा लागू किया जा रहा है.
UPI पेमेंट और MDR को लेकर क्या है नया नियम
- नए नियम का मुख्य असर पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M पेमेंट पर होगा और किसी दुकानदार या कारोबारी को 2,000 रुपये तक का UPI पेमेंट पहले की तरह बिना MDR के रहेगा.
- लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी एमडीआर देना होगा. 75,000 रुपये से ज्यादा के बड़े भुगतान के मामले में भी दर 0.4 फीसदी ही रहेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है. मसलन, अगर किसी दुकान पर 5,000 रुपये का UPI पेमेंट किया जाता है, तो 0.4 फीसदी के हिसाब से एमडीआर 20 रुपये बनेगा.
यानी MDR, ग्राहक के UPI पेमेंट में अलग से जोड़ने वाला चार्ज नहीं है, बल्कि मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के भीतर लगने वाला चार्ज है. जो दुकानदार को देना होगा.
तो क्या ग्राहक को एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ेंगे?
- नए नियम के अनुसार सरकार ने साफ कहा है कि एमडीआर ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है. बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इस लागत को ग्राहकों पर न डालें.
- यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियां जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay भी प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ शुल्क नहीं लगा सकतीं. हालांकि, व्यवहार में दुकानदार इस लागत को किस तरह संभालते हैं, यह देखने वाली बात होगी.
- सरकार और एनपीसीआई का कहना है कि डिजिटल भुगतान से कारोबार बढ़ने और नकदी संभालने की लागत घटने जैसे फायदे मिलते हैं, इसलिए सामान्य तौर पर व्यापारी इस तरह के शुल्क को अपने परिचालन खर्च का हिस्सा मान सकते हैं.
96 फीसदी लेनदेन पर नहीं पड़ेगा असर, छोटे दुकानदारों को मिलेगी राहत
- छोटे व्यापारियों और सड़क किनारे सामान बेचने वालों को नए नियम में राहत दी गई है. व्यक्तिगत बैंक खाते से जुड़े यूपीआई क्यूआर कोड पर महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान पाने वाले छोटे व्यापारियों से एमडीआर नहीं लिया जाएगा.
- अगर किसी व्यापारी के खाते में लगातार तीन महीने तक हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा का यूपीआई कारोबार आता है, तो उसे सामान्य मर्चेंट श्रेणी में शामिल किया जा सकता है.
- रेलवे, बीमा, ईंधन, बिजली-पानी, दूरसंचार, शिक्षा और कृषि जैसी जरूरी सेवाओं के भुगतान पर 5 रुपये प्रति लेनदेन की दर रहेगी. वहीं म्यूचुअल फंड, शेयर और ब्रोकर से जुड़े भुगतान पर 0.02 फीसदी एमडीआर, अधिकतम 300 रुपये तक, लगेगा. यूपीआई ऑटोपे और आवर्ती भुगतानों पर एमडीआर नहीं लगेगा.
- सरकार के मुताबिक करीब 96 फीसदी मर्चेंट यूपीआई लेनदेन एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे. इसका मुख्य असर 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र बड़े मर्चेंट भुगतानों पर होगा. यानी आम यूजर के लिए व्यक्ति को पैसे भेजना और 2,000 रुपये तक का मर्चेंट भुगतान मुफ्त रहेगा.
नए नियम से सरकार को क्या फायदा हो सकता है?
- UPI पर MDR लागू होने से सरकार को सीधे कमाई नहीं होगी. इस चार्ज से मिलने वाला एक्स्ट्रा पैसा बैंक, पेमेंट ऐप और एनपीसीआई जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ी कंपनी को मिलेगा. हालांकि, सरकार को GST और कॉरपोरेट इनकम टैक्स के जरिए कमाई बढ़ेगी.
- जानकारों का अनुमान है कि बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR से पेमेंट इंडस्ट्री में हर साल करीब 5,000 करोड़ से 22,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व पैदा हो सकता है.
- MDR पर 18 फीसदी GST लगता है. यानी अगर सालाना राजस्व 10,000 करोड़ रुपये रहता है, तो सरकार को करीब 1,800 करोड़ रुपये जीएसटी से मिल सकते हैं. इसके अलावा, बैंकों और फिनटेक कंपनियों का मुनाफा बढ़ने पर कॉरपोरेट टैक्स से भी अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है.
- सरकार को एक और फायदा सब्सिडी के मोर्चे पर हो सकता है. अभी यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए सरकार हर साल करीब 1,500-2,000 करोड़ रुपये खर्च करती है. नए सिस्टम से यह बोझ कम हो सकता है.
- यानी एमडीआर का पैसा सीधे सरकार को नहीं मिलेगा, लेकिन टैक्स बढ़ने और सब्सिडी का खर्च घटने से सरकार को आर्थिक फायदा हो सकता है.
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