UP Farmers News: उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद की प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए अब ‘फार्मर रजिस्ट्री’ की आवश्यकता नहीं होगी.
क्यों लिया गया यह फैसला ?
इस साल सरकार ने पारदर्शिता के लिए ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अनिवार्य की थी, लेकिन पोर्टल पर पंजीकरण न हो पाने के कारण हजारों किसान परेशान थे. पंजीकरण न होने की वजह से किसान बिचौलियों को कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो रहे थे. सरकारी केंद्रों पर लंबी वेटिंग और तकनीकी बाधाओं के कारण किसानों में रोष था. इन समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल हस्तक्षेप किया और पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने के निर्देश दिए.
अब तक की खरीद के आंकड़े (20 अप्रैल दोपहर तक)
खाद्य व रसद विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में गेहूं खरीद की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल खरीद: 2.38 लाख टन.
- लाभान्वित किसान: 42 हजार से अधिक.
- कुल पंजीकरण: 4.77 लाख से अधिक किसान पहले ही रजिस्टर कर चुके हैं.
- क्रय केंद्र: पूरे प्रदेश में 5,400 से अधिक सरकारी क्रय केंद्र सक्रिय हैं.
बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम करने को कहा :
- मूलभूत सुविधाएं: किसानों के लिए बैठने के लिए छाजन (शेड), पंखे और पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था.
- तत्काल भुगतान: गेहूं की तौल के बाद भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश.
- असुविधा पर कार्रवाई: यदि किसी भी केंद्र पर किसानों के साथ दुर्व्यवहार या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
किसानों के लिए क्या बदला ?
अब किसान अपनी जमीन के कागजात (खतौनी) और पहचान पत्र के आधार पर सीधे केंद्र जाकर गेहूं बेच सकते हैं. उन्हें उस जटिल डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना होगा जो उनके लिए बाधा बन रही थी.
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