ईरान पर ट्रंप की नई शर्त से बढ़ी टेंशन, फिर चढ़ा कच्चा तेल, ब्रेंट 88 डॉलर के करीब

ईरान पर ट्रंप के नए बयान के बाद तेल बाजार में चिंता बढ़ी है. ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर के करीब पहुंच गया और होर्मुज से सप्लाई रिस्क बढ़ गया है.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी बनी हुई है. इसके बढ़ने की वजह ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से युद्ध में मारे गए लोगों के लिए अमेरिका को मुआवजा देने की मांग की है. ट्रंप ने कहा कि यह शर्त आगे होने वाली सभी बातचीत में मजबूती से रखी जाएगी.

इस बयान के बाद बाजार में यह चिंता बढ़ गई है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता जल्दी नहीं हो पाएगा. इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही पर पड़ सकता है.

कच्चे तेल के दाम कितने बढ़े?

ब्रेंट क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत करीब 5 फीसदी उछली थी. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा. तेल बाजार की नजर फिलहाल इस बात पर है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सामान्य शिपिंग कब शुरू होती है. अभी इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही काफी कम है.

होर्मुज से तेल की आवाजाही क्यों अहम है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रास्तों में से एक है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी शिपमेंट इसी रास्ते से गुजरते थे. यही वजह है कि यहां लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित रहने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है. शिपिंग सामान्य होने में जितनी देरी होगी, ट्रेडर्स की नजर सप्लाई रिस्क पर उतनी ही बनी रहेगी. ईरान ने ओमान के साथ किसी समझौते के लिए मुआवजे और अमेरिका की नाकेबंदी खत्म करने जैसी शर्तें रखी हैं. ऐसे में ट्रंप की नई मांग बातचीत को और मुश्किल बना सकती है.

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क्या इसका असर डीजल और फ्यूल मार्केट पर भी पड़ रहा है?

हां. सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही प्रभावित नहीं हो रही है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से रिफाइनरी ऑपरेशन और डीजल सप्लाई पर भी असर पड़ा है. वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध भी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बनाए हुए है. इसका असर यूरोप के डीजल बाजार में भी दिखा. सोमवार को यूरोपीय डीजल फ्यूचर्स करीब 9 फीसदी उछल गए, जो जुलाई की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी एक-दिन की तेजी रही.

रेड सी में भी बढ़ा शिपिंग रिस्क

एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है. रेड सी में भी शिपिंग रिस्क बढ़ा है. ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने जहाजों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी है. IIR Energy के मुताबिक, हमले के बाद सऊदी अरामको ने जजान रिफाइनरी को दोबारा शुरू करने की तारीख आगे बढ़ाकर अगस्त के आखिर तक कर दी है. इस बीच ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मुआवजे की मांग पहले हुई बातचीत का हिस्सा नहीं थी. हालांकि, जून के एक मेमोरेंडम में ईरान के युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित फंड का जिक्र किया गया था.

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By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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