कम हुए चीनी के दाम: 18% सस्ते हुए मिल भाव, जानें थोक और खुदरा रेट

सरकारी हस्तक्षेप के बाद चीनी के मिल भाव में 18% की बड़ी गिरावट आई है, जो 55 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. जमाखोरी और सट्टेबाजी पर नकेल कसने के सरकार के कदमों से कीमतों में यह कमी आई है. जल्द ही इसका असर खुदरा बाजारों में भी देखने को मिलेगा.

सरकार द्वारा चीनी के आयात को मंजूरी देने और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर नकेल कसने के बाद चीनी के मिल भाव में 18 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले सप्ताह 67 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे मिल भाव अब घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं. हालांकि अभी खुदरा भाव में कोई कमी दर्ज नहीं की गई है.

चीनी का मिल भाव 55 रुपये तक पहुंचा

पिछले हफ्ते चीनी मिलों ने दाम बढ़ा दिए थे, जिससे कीमतें 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं. अब मिल भाव में 18% की गिरावट आई है और यह घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गया है.

"मिलों द्वारा बढ़ाए गए चीनी के मिल भाव अब ठंडे होने लगे हैं. ये घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं और आने वाले दिनों में इनमें और गिरावट देखने को मिलेगी. कीमतों में आया यह उछाल बुनियादी कारणों से नहीं था, क्योंकि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है." — संजीव चोपड़ा, खाद्य सचिव

बाजार की वर्तमान स्थिति

  • मिल भाव : 55 रुपये प्रति किलो
  • थोक (Wholesale) भाव : 58.29 रुपये प्रति किलो (24 अगस्त तक का औसत)
  • खुदरा (Retail) भाव : 63.05 रुपये प्रति किलो (24 अगस्त तक का औसत)
  • मिलों में दाम घटने का फायदा जल्द ही आम जनता को खुदरा दुकानों पर मिलेगा.

मिल से थोक और खुदरा रेट में कितना अंतर?

  • मिल से थोक: सामान्यतः मिल भाव और थोक भाव में 2 रुपये से 3 रुपये प्रति किलो का अंतर होता है.
  • मिल से खुदरा : मिल भाव और आम ग्राहक के लिए खुदरा भाव में 7 रुपये से 8 रुपये प्रति किलो का अंतर होता है.
"फिलहाल देश के किसी भी राज्य में मिल स्तर के भाव 55 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं हैं. केंद्र सरकार के समय पर किए गए हस्तक्षेप और देशभर में फ्लाइंग स्क्वाड की तैनाती से कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगी है. आने वाले दिनों में मिल भाव और नीचे आ सकते हैं." — प्रकाश नाईकनवरे, प्रबंध निदेशक (NFCSF)

सरकार की सख्ती और कदम

कीमतों पर लगाम लगाने और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए हैं.

  • आयात की छूट : 10 लाख टन कच्ची चीनी बाहर से मंगाने (इंपोर्ट करने) की इजाजत दी.
  • स्टॉक लिमिट: बड़े खरीदारों (जैसे मिठाई-प्रोसेसिंग कंपनियों) के चीनी जमा करने की सीमा तय कर दी.
  • फ्लाइंग स्क्वाड : जमाखोरी रोकने और कीमतों की निगरानी के लिए देशभर में उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं.

देश में चीनी का स्टॉक

भले ही वर्ष 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है, लेकिन चिंता की बात नहीं है. देश में सालभर की जरूरत (280-285 लाख टन) को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी का भंडार मौजूद है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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