Sri Lanka Fuel Price Hike : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी गंभीर संघर्ष और इसके चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (ग्लोबल एनर्जी सप्लाई) में आई रुकावटों का खामियाजा अब श्रीलंका की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
श्रीलंका में एक बार फिर पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल (केरोसिन) की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी गई है. वहां की सरकारी तेल कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CPC) ने शनिवार (30 मई, 2026) को ईंधन की नई दरों की घोषणा की, जो आधी रात से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं.
जनता से ईंधन कम खर्च करने की अपील
श्रीलंका के नागरिकों के लिए यह बढ़ोतरी कमर तोड़ने वाली है, क्योंकि पिछले महज तीन महीनों के दौरान ईंधन की कीमतों में यह 5वीं बढ़ोतरी है.
देश के बिगड़ते आर्थिक हालातों को देखते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने जनता से ईंधन की खपत (कंजम्पशन) को कम करने की भावुक अपील की है. राष्ट्रपति का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है.
श्रीलंका में अब क्या हैं पेट्रोल-डीजल के नए रेट?
सीपीसी (CPC) के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस बार पेट्रोल की कीमतों में 5.85 प्रतिशत और डीजल में 3.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है.
- डीजल: प्रति लीटर ₹15 (श्रीलंकाई रुपया) महंगा होने के बाद अब ₹407 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है.
- पेट्रोल: प्रति लीटर ₹24 की भारी बढ़ोतरी के साथ अब ₹434 प्रति लीटर पर आ गया है.
- मिट्टी का तेल (केरोसिन): गरीबों के इस्तेमाल में आने वाले केरोसिन के दाम भी ₹20 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं, जिससे अब इसकी कीमत ₹285 प्रति लीटर हो गई है.
सिर्फ 90 दिनों में ₹141 महंगा हुआ पेट्रोल
अगर पिछले तीन महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो श्रीलंका में ईंधन की कीमतें बेहद डरावनी रफ्तार से बढ़ी .
- 1 मार्च से 31 मई, 2026 के बीच कीमतों में 5 बार संशोधन किया गया है.
- इसमें से 3 बार तो कीमतें केवल मार्च महीने के शुरुआती 22 दिनों के भीतर ही बढ़ा दी गई थीं.
- फरवरी 2026 के अंत में जो पेट्रोल श्रीलंका में ₹293 प्रति लीटर बिक रहा था, वह महज 90 दिनों के भीतर ₹141 महंगा होकर अब ₹434 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है.
डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपया भी पस्त
ईंधन के महंगे होने के पीछे केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ना ही एकमात्र कारण नहीं है. श्रीलंका के केंद्रीय बैंक (Central Bank of Sri Lanka) के अनुसार, मई के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपया लगातार कमजोर हुआ है. करेंसी कमजोर होने की वजह से श्रीलंका के लिए विदेशों से तेल का आयात करना और भी ज्यादा महंगा हो गया है.
Also Read : इस हफ्ते RBI का फैसला और अमेरिका-ईरान वार्ता तय करेंगे बाजार की दिशा; देखें अहम ट्रिगर्स
