छत्तीसगढ़ में लगेगा भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट, 11 अप्रैल को होगा भूमि पूजन

Semiconductor Plant: छत्तीसगढ़ में देश का पहला गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर प्लांट 11 अप्रैल को स्थापित होगा. करीब 1,143 करोड़ के निवेश से बनने वाला यह संयंत्र भारत को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा. पॉलीमेटेक द्वारा स्थापित यह प्लांट 5G, 6G और रक्षा तकनीकों के लिए चिप्स बनाएगा.

Semiconductor Plant: छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में देश का पहला गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किया जा रहा है. राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 11 अप्रैल 2025 को इस परियोजना की आधारशिला रखेंगे. यह फैक्ट्री भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

करीब 1,143 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाला यह अत्याधुनिक संयंत्र चेन्नई की पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर से स्थापित किया जा रहा है. कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2030 तक हर साल 10 अरब चिप्स का उत्पादन करेगी. यह चिप्स 5G, 6G, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं.

क्यों है GaN तकनीक खास?

  • गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित चिप्स पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की तुलना में तेज और अधिक ऊर्जा दक्ष होती हैं.
  • यह काफी टिकाऊ होती है.
  • हाई-फ्रीक्वेंसी एप्लिकेशन के लिए आदर्श होती हैं।
  • इससे भारत की सेमीकंडक्टर आयात पर निर्भरता घटेगी और यह देश को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में ले जाएगा.

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निवेशकों के लिए सुनहरा मौका

छत्तीसगढ़ के वाणिज्य और उद्योग सचिव रजत कुमार ने कहा, “पॉलीमेटेक के साथ यह साझेदारी राज्य को टेक्नोलॉजी हब में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम है.” राज्य की उद्यमी-अनुकूल नीतियां, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और तेज निर्णय प्रक्रिया इसे निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रही हैं.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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