SBI Nationwide Strike : देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में इस महीने के अंत में कामकाज प्रभावित हो सकता है. ‘ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन’ (AISBISF) ने 25 और 26 मई 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.
यह हड़ताल मुख्य रूप से ‘वर्कमेन’ (workmen) कैटेगरी के कर्मचारियों द्वारा अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है. फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि 25 या 26 मई को छुट्टी होती है, तो हड़ताल अगले दिन यानी 27 मई तक जारी रहेगी.
प्रमुख मांगें: NPS और पेंशन संबंधी मुद्दे
कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांगों में से एक NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) के तहत फंड मैनेजर बदलने का विकल्प देना है. फेडरेशन का कहना है कि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को अपना फंड मैनेजर चुनने की आजादी है, जिससे उनकी सेवानिवृत्ति बचत बेहतर हो रही है, लेकिन SBI कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा गया है. सातवें द्विपक्षीय समझौते के तहत रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में सभी वेतन घटकों (pay components) को जोड़ने की मांग भी उठाई गई है.
भर्ती और आउटसोर्सिंग का विरोध
संगठन ने पिछले तीन दशकों से ‘मैसेंजर’ और ‘सशस्त्र गार्ड’ (Armed Guards) की भर्ती न होने पर चिंता जताई है. सूरत शाखा में हाल ही में हुई डकैती का हवाला देते हुए सशस्त्र गार्डों की कमी को गंभीर लापरवाही बताया गया है. फेडरेशन का कहना है कि स्थायी नौकरियों को खत्म कर आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवाओं के रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं.
‘पैरिटी’ (वेतन समानता) का मुद्दा
12वें द्विपक्षीय समझौते (12th Bipartite Settlement) के बाद वेतन विसंगति का मुद्दा गरमाया हुआ है. फेडरेशन के अनुसार, अधिकारियों को अतिरिक्त ‘स्पेशल पे’ देकर उनकी प्रभावी वेतन वृद्धि करीब 22% कर दी गई है, जबकि वर्कमेन कैटेगरी के लिए इसे 17% पर ही सीमित रखा गया है. कर्मचारी इस भेदभाव को खत्म करने की मांग कर रहे हैं.
हड़ताल से पहले के विरोध कार्यक्रम
हड़ताल को सफल बनाने के लिए फेडरेशन ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:
- 6 मई: सोशल मीडिया कैंपेन.
- 7 मई: प्रेस वार्ता (LHO/AO सेंटर्स पर).
- 8 मई: सभी प्रमुख केंद्रों पर मौन धरना (Silent Sit-in).
- 11 मई: जिला मुख्यालयों पर लंच टाइम प्रदर्शन.
- 18 मई: धरना प्रदर्शन.
- 19 मई: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपना.
इन मांगों पर भी है जोर
- 2019 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए ‘इंटर-सर्किल ट्रांसफर’ (Inter Circle Transfer) की सुविधा.
- क्रॉस-सेलिंग (Cross-selling) के नाम पर ‘मिस-सेलिंग’ (Mis-selling) को रोकना.
- मेडिकल प्रतिपूर्ति योजना (Medical Reimbursement Scheme) में सुधार.
- HRMS से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान.
Also Read : रिटायरमेंट के बाद खर्च की नो टेंशन, FD, Annuity या SWP कौन भरेगा आपकी जेब?
