राशन वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव , AI से रुकेगी राशन की कालाबाजारी

Sarthak PDS Scheme : राशन वितरण प्रणाली (PDS) को हाईटेक बनाएगी सरकार! ₹25,530 करोड़ के बजट वाली ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को मंजूरी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तीन नए मॉड्यूल, निर्मल, आशा और सक्षम रोकेंगे राशन की कालाबाजारी.

Sarthak PDS Scheme : देश के करोड़ों राशन कार्डधारकों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर केन्द्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला किया है. बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने राशन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और हाईटेक बनाने के लिए ‘सार्थक-पीडीएस’ (SARTHAK-PDS) योजना को मंजूरी दे दी है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इस बड़े फैसले का ऐलान किया. सरकार इस योजना पर कुल ₹25,530 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य तकनीक की मदद से राशन की चोरी (लीकेज) को रोकना और आम नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराना आसान बनाना है.

अगले 5 साल तक चलेगी यह योजना

कैबिनेट ब्रीफिंग में साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सार्थक-पीडीएस योजना को एक निश्चित समय सीमा के भीतर लागू किया जाएगा.

  • समय सीमा: यह योजना पूरे 5 साल के लिए होगी, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2031 तक चलेगी.
  • राज्यों को मदद: इसके तहत राज्य सरकारों की एजेंसियों को राज्यों के भीतर अनाज की ढुलाई (Intra-state movement) के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी.
  • राशन दुकानों का आधुनिकीकरण: इसके जरिए देश भर की सरकारी राशन की दुकानों (Fair Price Shops) को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा.

‘स्मार्ट पीडीएस’ के 3 नए मॉड्यूल

राशन प्रणाली के अगले चरण (SMART PDS) को मजबूत करने के लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित तीन विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत कर रही है.

निर्मल (NIRMAL) असली लाभार्थियों की पहचान : यह एक AI-संचालित रियल-टाइम लाभार्थी रजिस्ट्री (PDS Beneficiary Registry) के रूप में काम करेगा. यह अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी योजनाओं के डेटा को आपस में जोड़ेगा. इससे फर्जी राशन कार्डों को हटाने और सिर्फ वास्तविक व पात्र लाभार्थियों तक राशन पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा.

आशा (ASHA) आपकी भाषा में शिकायतों का तुरंत निपटारा : यह एक बहुभाषी (Multilingual) AI शिकायत और नागरिक जुड़ाव प्लेटफॉर्म है. देश के नागरिक अपनी मनपसंद भाषा में फोन कॉल, वॉट्सऐप (WhatsApp), IVRS या चैटबॉट के जरिए राशन से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे. यह सिस्टम इतना एडवांस होगा कि हर दिन 3 लाख से ज्यादा शिकायतों को संभालने में सक्षम होगा.

सक्षम (SAKSHAM) अनाज की बोरियों पर रहेगी नजर : यह पूरी तरह से AI-आधारित सप्लाई चैन सिस्टम होगा. इसमें गाड़ियों की लाइव ट्रैकिंग (Vehicle Tracking), मांग का पूर्वानुमान (Demand Forecasting) और सबसे छोटे व सही रास्तों का चुनाव (Route Optimisation) जैसी खूबियां होंगी.

अनाज की बर्बादी रुकेगी और होगी ₹280 करोड़ की सालाना बचत : छोटी होगी अनाज की यात्रा: इस नई तकनीक के लागू होने से गोदामों से राशन की दुकानों तक अनाज ले जाने की दूरी में 15 से 50 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है. इससे स्थानीय स्तर पर अनाज की खरीद (Local Procurement) को बढ़ावा मिलेगा.

करोड़ों की बचत और कम प्रदूषण: लॉजिस्टिक्स में होने वाले इस सुधार से सरकार को हर साल करीब ₹280 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी. इसके साथ ही, गाड़ियों के कम चलने से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) में भी 35 प्रतिशत की भारी कमी आएगी.

पारदर्शिता के लिए QR कोड : अब राशन के हर बोरे पर QR-Coded Tags लगाए जाएंगे और गाड़ियों में लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम होगा. इससे अनाज के गोदाम से निकलने से लेकर राशन की दुकान तक पहुंचने की पल-पल की निगरानी हो सकेगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से राशन की कालाबाजारी पूरी तरह बंद होगी और जनता को बिना किसी परेशानी के उनका हक मिल सकेगा.

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

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शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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