Rupee vs Dollar: भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को शानदार रिकवरी के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में रुपये की हालत पतली बनी हुई है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है. मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर 93.73 के स्तर पर पहुंच गया.
बाजार की शुरुआत और उतार-चढ़ाव
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपये की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई. यह डॉलर के मुकाबले 93.66 पर खुला, लेकिन देखते ही देखते गिरावट बढ़ गई और यह 93.73 के निचले स्तर तक चला गया. सोमवार को रुपया एक समय 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया था, हालांकि दिन के अंत में संभलकर 93.53 पर बंद हुआ था. आज की गिरावट पिछले बंद भाव के मुकाबले 20 पैसे की कमजोरी दर्शाती है.
क्यों टूट रहा है रुपया ?
रुपये की इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं.
- महंगा होता कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 3.96% की बढ़त के साथ 103.9 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है.
- विदेशी पूंजी की निकासी: शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को भारी बिकवाली की और 10,414.23 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. पूंजी का देश से बाहर जाना रुपये के लिए बड़ा झटका है.
- डॉलर सूचकांक में मजबूती: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.42% की बढ़त के साथ 99.36 पर पहुँच गया है.
ट्रंप के दावों और ईरान के इनकार के बीच अनिश्चितता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं और युद्ध टालने के लिए बिजली संयंत्रों पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया है. हालांकि, ईरान ने इन दावों को नकार दिया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. इसी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को हवा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है.
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