Crude Oil Price: सोमवार सुबह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ी तेजी देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए ठुकरा दिया है, जिससे युद्ध खत्म होने की उम्मीदें टूट गई हैं.
तेल की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई?
जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रस्ताव को खारिज किया, बाजार में खलबली मच गई. ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3.5% बढ़कर 104.80 डॉलर पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) 99 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है. ट्रंप का कहना है कि ईरान गेम खेल रहा है और अमेरिका उसे परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं देगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है चर्चा में?
दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई करता है. युद्ध की वजह से इस समुद्री रास्ते से होने वाला व्यापार काफी कम हो गया है. हाल ही में कतर के पास एक कार्गो शिप पर ड्रोन हमला भी हुआ, जिसने इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ा दी है. जानकारों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो तेल की सप्लाई सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है.
आम जनता पर इसका क्या असर होगा?
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. भारत में भी सरकार ने एहतियात के तौर पर वर्क फ्रॉम होम और कारपूल जैसे पुराने तरीकों पर विचार करना शुरू कर दिया है ताकि फ्यूल की खपत कम की जा सके. वॉल स्ट्रीट और गोल्डमैन सैक्स जैसे बड़े संस्थानों का अनुमान है कि तेल की कीमतों में यह अस्थिरता इस साल के अंत तक जारी रह सकती है.
क्या युद्ध जल्द खत्म होने वाला है?
फिलहाल शांति के आसार कम नजर आ रहे हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है. आने वाले दिनों में ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां ईरान को मिलने वाले समर्थन पर चर्चा हो सकती है.
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