Dollar vs Rupee: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगले हफ्ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹90.40 से ₹91.20 के बीच रह सकता है. इसका मतलब है कि रुपया बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे होने के बजाय एक दायरे में टिका रहेगा.
रुपये को मजबूती देने वाली 3 बड़ी बातें
- विदेशी निवेश: भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशक लगातार पैसा लगा रहे हैं. अगर यह जारी रहा, तो रुपया और मजबूत होकर ₹90.10 के स्तर तक भी पहुँच सकता है.
- भारी विदेशी मुद्रा भंडार: भारत के पास 725.73 अरब डॉलर का इमरजेंसी फंड (विदेशी मुद्रा भंडार) है, जो अब तक का सबसे ज्यादा है. यह एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है, जो दुनिया भर में आर्थिक उथल-पुथल होने पर भी रुपये को गिरने से बचाता है.
- AI का फायदा: रिपोर्ट कहती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक की वजह से भारत का एक्सपोर्ट (निर्यात) बढ़ेगा. इससे देश में ज्यादा डॉलर आएंगे, जिससे रुपया भविष्य में और मजबूत होगा.
क्या हैं चुनौतियां ?
आईटी (IT) सेक्टर में आ रहे बदलावों और दुनिया के हालातों की वजह से बीच-बीच में थोड़ी बहुत उतार-चढ़ाव (अस्थिरता) देखने को मिल सकती है. लेकिन कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण रुपया फिलहाल सुरक्षित नजर आ रहा है.
पिछले सप्ताह के दौरान, भारी व्यापार घाटे (34.68 बिलियन डॉलर) और निरंतर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी के बावजूद रुपया ₹90.60 से ₹90.70 के सीमित दायरे में स्थिर रहा. इस स्थिरता का मुख्य कारण भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद (Macroeconomic Fundamentals) है. वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 725.73 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है, जो रुपये को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच (Buffer) का काम कर रहा है.
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