UPI में बड़ा बदलाव, अब रोजाना 10 लाख तक का ट्रांजैक्शन, Collect फीचर 1 अक्टूबर से बंद

Rules Change : नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI के जरिए हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन की लिमिट बढ़ाकर रोजाना 10 लाख रुपये कर दी है. निवेश, बीमा, ट्रैवल, लोन और क्रेडिट कार्ड पेमेंट अब आसानी से हो सकेंगे. वहीं, धोखाधड़ी रोकने के लिए P2P Collect फीचर 1 अक्टूबर से बंद होगा.

Rules Change : भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई (UPI) लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अब इसमें बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत उपयोगकर्ता रोजाना 10 लाख रुपये तक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन कर सकेंगे. वहीं, 1 अक्टूबर 2025 से P2P Collect Request फीचर पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा.

किन ट्रांजैक्शन पर बढ़ी लिमिट?

नए नियमों के तहत कई कैटेगरी में पेमेंट लिमिट बढ़ाई गई है:

  • कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस: प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 लाख और डेली कैप ₹10 लाख.
  • क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट: प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 लाख, डेली लिमिट ₹6 लाख.
  • ज्वेलरी खरीदारी: प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट ₹2 लाख, डेली कैप ₹6 लाख.
  • ट्रैवल बुकिंग, लोन रीपेमेंट और गवर्नमेंट e-Marketplace: प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 लाख, डेली कैप ₹10 लाख.
  • हॉस्पिटल और एजुकेशन पेमेंट: डेली लिमिट ₹10 लाख, प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 लाख (पहले ही लागू).
  • सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश: डेली लिमिट ₹10 लाख तय.

P2P ट्रांजैक्शन पर कोई बदलाव नहीं

आम लोगों के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट की सीमा पहले की तरह ही ₹1 लाख प्रतिदिन रहेगी. इसका मकसद छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन को सुरक्षित बनाए रखना है.

क्यों बंद हो रहा है Collect Request फीचर?

NPCI ने कहा है कि 1 अक्टूबर 2025 से P2P Collect Request फीचर बंद कर दिया जाएगा. अब व्यक्ति केवल QR कोड स्कैन या UPI ID डालकर ही पैसा भेज सकेंगे. दरअसल, इस फीचर का दुरुपयोग बढ़ गया था. धोखाधड़ी करने वाले कैशबैक और इनाम के नाम पर लोगों से पैसा मांगकर फ्रॉड कर रहे थे. इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.

बैंकबाजार के अंकित बगड़िया का कहना है कि NPCI ने सिर्फ चुनिंदा वेरिफाइड मर्चेंट्स के लिए लिमिट बढ़ाई है. इससे हाई-वैल्यू पेमेंट्स तेज होंगे और धोखाधड़ी का रिस्क कम रहेगा. वहीं, एक्स-बैंकर समीत सिंह ने कहा कि P2P ट्रांजैक्शन की सीमा 1 लाख पर बरकरार रखना आम लोगों के लिए सुरक्षा का काम करेगा.

आम लोगों को क्या फायदा?

अब निवेश, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड बिल, ट्रैवल बुकिंग और ज्वेलरी जैसी बड़ी डीलिंग्स सीधे UPI से हो सकेंगी. इससे चेक, RTGS या NEFT जैसी धीमी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होगी. व्यापारियों और निवेशकों को बड़ी राशि तुरंत ट्रांसफर करने में आसानी होगी.

Also Read: बस एक दिन और बाबू भइया, फिर ITR न भरने पर लगेगी भारी पेनाल्टी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >