सोना, जमीन और करोड़ों की दौलत, जानिए किस मंदिर के पास है कितना खजाना

Richest Temple in India: क्या आपने कभी किसी मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते समय सोचा है कि आखिर ये पैसा, सोना और गहने जाते कहां हैं? या फिर देश का सबसे अमीर मंदिर कौन-सा है और उसके पास कितनी संपत्ति होगी?

Richest Temple in India: शायद ज्यादातर लोगों का जवाब ना में ही होगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के कुछ मंदिरों के पास इतनी दौलत है, जितनी कई बड़ी कंपनियों और राज्यों के सालाना बजट के बराबर मानी जाती है. इनमें सोना, चांदी, करोड़ों रुपये की नकदी, हजारों एकड़ जमीन और बड़े निवेश शामिल हैं. आइए जानते हैं भारत के सबसे अमीर मंदिरों के बारे में और समझते हैं कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति है.

कौन-सा मंदिर है सबसे अमीर?

सबसे पहले नाम आता है आंध्र प्रदेश के तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर का. TTD व्हाइट पेपर के मुताबिक इस मंदिर ट्रस्ट की कुल संपत्ति करीब ₹2.26 लाख करोड़ है. इसमें सोने की जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन और निवेश शामिल हैं. मंदिर की सालाना आय ₹5,100 करोड़ से ज्यादा है, जबकि हर साल करीब ₹1,500 करोड़ का दान मिलता है. यहां 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर (PC: Wikipedia)

दूसरे स्थान पर केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर आता है. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई सूची के अनुसार मंदिर के तहखानों में मिले सोने, हीरे, प्राचीन सिक्कों और आभूषणों की कीमत ₹1.2 लाख करोड़ से ज्यादा आंकी गई है. मंदिर का रहस्यमयी Vault B अब तक नहीं खोला गया है, इसलिए माना जाता है कि वास्तविक खजाना इससे भी बड़ा हो सकता है. मंदिर को मिलने वाले वार्षिक दान का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (PC: Social Media)

बाकी बड़े मंदिरों की कमाई कितनी है?

देश के अन्य बड़े मंदिर भी संपत्ति और आय के मामले में काफी आगे हैं.

  • शिरडी साईं बाबा मंदिर (महाराष्ट्र) की अनुमानित संपत्ति ₹2,500 से ₹3,000 करोड़ है. इसकी सालाना आय ₹400 से ₹700 करोड़ के बीच रहती है. ट्रस्ट अस्पताल, स्कूल और कई सामाजिक कल्याण योजनाएं भी चलाता है.
शिरडी साईं बाबा मंदिर (PC: Wikipedia)
  • गुरुवायूर मंदिर (केरल) के पास ₹1,700 से ₹2,500 करोड़ की संपत्ति है. इसकी सालाना आय ₹250 से ₹400 करोड़ के बीच है. गुरुवायूर देवस्वम कई सामाजिक और धार्मिक सेवाएं भी संचालित करता है.
गुरुवायूर मंदिर (PC: Wikipedia)
  • श्री माता वैष्णो देवी श्राइन (जम्मू-कश्मीर) की संपत्ति ₹2,000 करोड़ से ज्यादा है. वित्त वर्ष 2023-24 में इसकी कुल आय ₹683 करोड़ रही, जबकि सिर्फ चढ़ावे और दान से ₹255 करोड़ मिले. यहां की आय का बड़ा हिस्सा यात्रा, ठहरने और हेलीकॉप्टर सेवा से भी आता है.
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन (PC: Wikipedia)
  • मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर ₹500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति रखता है. इसकी सालाना आय करीब ₹100 से ₹130 करोड़ है. ट्रस्ट स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कार्यों पर भी बड़ी रकम खर्च करता है.
सिद्धिविनायक मंदिर (PC: Official Website)

इस सूची में और कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं?

इनके अलावा स्वर्ण मंदिर (अमृतसर), काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), जगन्नाथ मंदिर (पुरी), सोमनाथ मंदिर (गुजरात), अयोध्या राम मंदिर, मीनाक्षी अम्मन मंदिर (मदुरै), सबरीमाला अयप्पा मंदिर (केरल) और महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन) भी देश के सबसे संपन्न मंदिरों में गिने जाते हैं. हालांकि इन मंदिरों की कुल संपत्ति का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इनके पास हजारों एकड़ जमीन, कीमती आभूषण और करोड़ों रुपये की संपत्ति है. अयोध्या राम मंदिर को उद्घाटन के बाद से ₹3,500 करोड़ से ज्यादा का दान मिल चुका है. सबरीमाला अयप्पा मंदिर तीर्थ सीजन के दौरान हर साल ₹300 करोड़ से ज्यादा का संग्रह करता है. वहीं स्वर्ण मंदिर को हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का दान मिलता है, काशी विश्वनाथ मंदिर की अनुमानित संपत्ति ₹500 करोड़ से अधिक बताई जाती है, जगन्नाथ मंदिर के पास हजारों एकड़ जमीन और बहुमूल्य आभूषण हैं, सोमनाथ मंदिर की संपत्ति भी सैकड़ों करोड़ रुपये आंकी जाती है, जबकि महाकालेश्वर मंदिर को हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा मिलता है.

आखिर मंदिरों के पास इतनी संपत्ति कैसे आई?

इन मंदिरों की संपत्ति सिर्फ आज के दान की वजह से नहीं है. सदियों से श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे, सोना-चांदी, जमीन, निवेश और ट्रस्ट की वित्तीय योजनाओं ने इनकी संपत्ति को लगातार बढ़ाया है. यही वजह है कि आज ये मंदिर सिर्फ आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि देश के सबसे संपन्न धार्मिक संस्थानों में भी शामिल हैं.

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By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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