नए ड्राफ्ट में बड़े RCBs के ग्राहकों के लिए होम लोन की लिमिट बढ़ाने के साथ-साथ बैंकों को लोन की अवधि तय करने में ज्यादा आजादी देने की बात कही गई है. साथ ही, किसी एक ग्राहक या ग्रुप को बैंक कितना कर्ज दे सकता है, इसकी नई लिमिट भी प्रस्तावित की गई है.
RBI ने गुरुवार, 6 अगस्त को इन बदलावों से जुड़े दो ड्राफ्ट जारी किए हैं. इन पर रेगुलेटेड संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स 28 अगस्त 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं. नियमों को अंतिम रूप मिलने पर ये 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे.
नए नियमों में क्या बदलेगा?
RBI ने एक ही काउंटरपार्टी और काउंटरपार्टियों के ग्रुप को दिए जाने वाले कर्ज पर नई लिमिट प्रस्तावित की है.
- किसी एक काउंटरपार्टी पर एक्सपोजर टियर-1 कैपिटल के 20% तक होगा.
- काउंटरपार्टियों के एक ग्रुप पर यह लिमिट 25% होगी.
- एक प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी (PACS) के लिए यह लिमिट 30% तक हो सकती है. हालांकि, इसके लिए संबंधित राज्य के को-ऑपरेटिव कानून लागू होंगे.
RBI ने सेक्टर के हिसाब से पहले से तय ज्यादातर एक्सपोजर लिमिट हटाने का भी प्रस्ताव दिया है. सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर के लिए तय सीमा जारी रखने की बात कही गई है. बाकी सेक्टर्स में बैंक अपने बिजनेस मॉडल और रिस्क के हिसाब से बोर्ड-अप्रूव्ड इंटरनल लिमिट तय कर सकेंगे.
रियल एस्टेट और अनसिक्योर्ड लोन की लिमिट कितनी होगी?
रियल एस्टेट सेक्टर में RCBs के कुल एक्सपोजर को कुल लोन और एडवांस के 15% तक सीमित रखने का प्रस्ताव है. वहीं, इंडिविजुअल हाउसिंग लोन को छोड़कर दूसरे रियल एस्टेट एक्सपोजर की सीमा 5% होगी.
अनसिक्योर्ड एडवांस यानी बिना सिक्योरिटी वाले कर्ज को लेकर भी नई सीमा प्रस्तावित है. ऐसे कुल एडवांस बैंक के कुल लोन और एडवांस के 15% से ज्यादा नहीं होंगे. अलग-अलग बैंकों के आकार के हिसाब से व्यक्तिगत ग्राहकों को दिए जाने वाले अनसिक्योर्ड लोन पर भी लिमिट तय होगी.
किस RCB से कितना होम लोन मिलेगा?
नए प्रस्ताव का सीधा असर होम लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है. RBI ने बैंक के डिपॉजिट के हिसाब से अधिकतम हाउसिंग लोन लिमिट तय करने का प्रस्ताव दिया है:
| RCB में कुल डिपॉजिट | अधिकतम होम लोन |
| ₹10,000 करोड़ से ज्यादा | ₹3 करोड़ |
| ₹1,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ | ₹2 करोड़ |
| ₹100 करोड़ से ₹1,000 करोड़ | ₹1.4 करोड़ |
| ₹100 करोड़ तक | ₹60 लाख |
यानी बड़े ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंकों से घर खरीदने के लिए ज्यादा रकम का लोन मिल सकेगा.
बड़े RCBs को और क्या राहत मिलेगी?
₹1,000 करोड़ से ज्यादा डिपॉजिट वाले RCBs को होम लोन की अवधि और मोरेटोरियम पीरियड अपनी बोर्ड-अप्रूव्ड पॉलिसी के आधार पर तय करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है.
दूसरे RCBs के लिए हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि 20 साल होगी, जिसमें मोरेटोरियम पीरियड भी शामिल रहेगा. अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के मामले में मोरेटोरियम अधिकतम 24 महीने का होगा.
इसके अलावा, बैंक के बायलॉज और लागू को-ऑपरेटिव कानून अनुमति दें तो नॉमिनल मेंबर्स को भी लोन देने का रास्ता खोला जा सकता है. हालांकि, ऐसे लोन सिर्फ डिपॉजिट, सोना-चांदी के आभूषण, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी या सरकारी सिक्योरिटीज के बदले दिए जा सकेंगे और इसकी सीमा बोर्ड-अप्रूव्ड होगी.
RBI ने ये प्रस्ताव 5 अगस्त को जारी अपने स्टेटमेंट ऑन डेवलपमेंटल एंड रेगुलेटरी पॉलिसीज में की गई घोषणाओं के बाद पेश किए हैं.
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