RBI की ₹7 लाख करोड़ की Liquidity Test से बाजार में क्या बदलेगा, बैंकिंग से लेकर कर्ज और FD तक समझें पूरा असर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम से करीब ₹7 लाख करोड़ की extra नकदी वापस लेने का फैसला किया है. इसके लिए RBI ने 30 दिनों की विशेष योजना (VRRR नीलामी) शुरू की है.

जब RBI बाजार से इतना सारा पैसा वापस लेता है, तो इसका असर बैंकों के कामकाज, आपके लोन की किश्त (EMI), FD के ब्याज और शेयर बाजार पर पड़ता है. आइए इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं.

RBI बाजार से इतना सारा पैसा वापस क्यों निकाल रहा है?

  • विदेशी पैसा भारत आना: विदेशों से भारत में काफी निवेश आया है और विदेशी जमा (FCNR) का पैसा भी बैंकों में बढ़ा है.
  • महंगाई बढ़ने का डर: जब बैंकों के पास बहुत ज्यादा अतिरिक्त कैश पड़ा रहता है, तो इससे बाजार में बिना वजह खर्च बढ़ता है और महंगाई (Inflation) बढ़ने लगती है.
  • VRRR क्या है: यह RBI का एक तरीका है. बैंक अपना अतिरिक्त कैश RBI के पास जमा करा देते हैं और उस पर ब्याज कमाते हैं. इससे वह पैसा बाजार में घूमने की बजाय सुरक्षित ब्लॉक हो जाता है और बाजार में कैश का फ्लो संतुलित हो जाता है.

बैंकों के ग्राहकों पर क्या असर होगा?

  • होम लोन और पर्सनल लोन: फिलहाल रेपो रेट 6.50% पर टिका हुआ है. इस फैसले के बाद लोन सस्ता होने की उम्मीद अभी खत्म हो गई है. हालांकि आपके पुराने लोन की किश्त तुरंत नहीं बढ़ेगी, लेकिन बैंक नए लोन पर मिलने वाले डिस्काउंट या छूट बंद कर सकते हैं.
  • FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) की दरें: चूंकि बैंकों को नए पैसों की जरूरत होगी, इसलिए वे ग्राहकों को लुभाने के लिए FD पर ब्याज दरें मजबूत रखेंगे. आने वाले 2 से 4 हफ्तों में 1 से 3 साल की FD पर ब्याज 0.10% से 0.25% तक थोड़ा बढ़ सकता है.
  • असर कब दिखेगा: बड़े वित्तीय बाजारों में असर तुरंत दिखेगा, जबकि आम ग्राहकों के लोन और FD पर इसका असर 2 से 4 हफ्तों में दिखने लगेगा.

शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट पर क्या होगा असर?

  • बैंकों के शेयर (Banking Stocks): अतिरिक्त कैश RBI के पास रखने से बैंकों को तय ब्याज मिलेगा, हालांकि कैश कम होने से बैंकिंग शेयरों में तेजी की उम्मीद कम है.
  • सरकारी बॉन्ड (G-Sec Yield): जब बाजार में कैश कम होता है, तो बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न (यील्ड) थोड़ा बढ़ जाता है.
  • रुपये की मजबूती: बाजार से अतिरिक्त रुपया कम होने से अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया मजबूत और स्थिर होता है.

क्या इससे लोन की दरें (Repo Rate) बढ़ जाएंगी?

  • नहीं, यह केवल पैसों का संतुलन बनाने का कदम है.
  • रेपो रेट और VRRR में फर्क: रेपो रेट का मतलब है वह दर जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. VRRR का मतलब है बैंकों का अतिरिक्त पैसा RBI द्वारा वापस जमा कर लेना.
  • RBI की क्या है सोच: RBI अभी लोन की दरें बढ़ाने या घटाने के मूड में नहीं है. वह सिर्फ बाजार में कैश का सही संतुलन बनाए रखना चाहता है.

आम आदमी को अब क्या करना चाहिए?

  • लोन लेने वाले: अगर आप होम लोन या कार लोन लेने की सोच रहे हैं, तो ब्याज दरें घटने का इंतजार न करें. मौजूदा दरों (8.50% - 9.00%) के हिसाब से ही अपने बजट की योजना बनाएं.
  • FD कराने वाले: अगर आप FD में पैसा लगाना चाहते हैं तो यह सही समय है. बैंक जल्द ही अच्छी ब्याज दरों वाली योजनाएं ला सकते हैं, इसलिए 2 से 3 साल के लिए पैसा लॉक करना फायदेमंद हो सकता है.

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है. इसमें दिए गए आंकड़े और विश्लेषण वित्तीय बाजार की स्थितियों पर आधारित हैं. किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्णय (जैसे लोन लेना, FD कराना या शेयर बाजार में निवेश करना) लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य करें.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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