RBI Digital Fraud Compensation 2026: डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. RBI ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत 50,000 रुपये तक की डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के शिकार ग्राहकों को मुआवजा मिलेगा. यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी और एक साल तक प्रभावी रहेगी.
सबसे अहम बात यह है कि धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक की गलती साबित करने की जिम्मेदारी अब बैंक पर होगी.
किसे मिलेगा मुआवजा?
RBI के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति, व्यक्तिगत ग्राहक या एकल स्वामित्व (Sole Proprietor) वाला कारोबारी डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड का शिकार होता है और उसकी कुल हानि 50,000 रुपये तक है, तो उसे मुआवजा मिल सकेगा. हालांकि यह लाभ किसी व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार मिलेगा.
मुआवजा देगा कौन?
मुआवजे का पूरा बोझ केवल बैंक पर नहीं होगा. इसमें RBI भी हिस्सा देगा.
| नुकसान की स्थिति | RBI का हिस्सा | ग्राहक का बैंक | लाभार्थी बैंक* |
| 85% मुआवजा वाला मामला | 65% | 10% | 10% |
| 25,000 रुपये का अधिकतम मुआवजा | ₹19,118 | ₹2,941 | ₹2,941 |
यह व्यवस्था घरेलू (Domestic) लेनदेन के मामलों में लागू होगी. यदि धोखाधड़ी वाला ट्रांजैक्शन विदेश से जुड़ा है, तो लाभार्थी बैंक का हिस्सा ग्राहक के बैंक को उठान होगा.
अगर बाद में पैसा रिकवर हो जाए तो क्या होगा?
RBI ने साफ किया है कि 25,000 रुपये मुआवजे की अधिकतम सीमा है, लेकिन ग्राहक का नुकसान इससे अधिक होने पर बाद में हुई रिकवरी का फायदा भी उसे मिलेगा.
उदाहरण के लिए:
- यदि किसी ग्राहक का 40,000 रुपये का नुकसान हुआ.
- बैंक ने पहले 15,000 रुपये वापस दिला दिए.
- ग्राहक का वास्तविक नुकसान 25,000 रुपये रह गया.
ऐसी स्थिति में ग्राहक को 21,250 रुपये का मुआवजा मिलेगा, जो नेट लॉस का 85% है. अगर मुआवजा देने के बाद भी बैंक अतिरिक्त रकम रिकवर कर लेता है, तो उसका लाभ भी ग्राहक को दिया जाएगा और फिर RBI तथा बैंकों के बीच राशि का एडजस्टमेंट किया जाएगा.
किन मामलों में नियम लागू नहीं होंगे?
यह नई व्यवस्था केवल उन मामलों के लिए है, जिनमें डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी से नुकसान 50,000 रुपये तक हुआ है. यदि नुकसान 50,000 रुपये से अधिक है, तो ऐसे मामलों का निपटारा मौजूदा बैंकिंग प्रक्रियाओं और नियमों के अनुसार किया जाएगा. RBI के ये निर्देश 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2027 तक होने वाले फ्रॉड मामलों पर लागू रहेंगे.
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