Petrol Diesel Export Levy: केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाली लेवी में 1 सितंबर 2026 से बदलाव किया है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को देखते हुए सरकार हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा कर रही है. नई दरें अगले 15 दिनों के लिए लागू रहेंगी.
इस बदलाव में पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ₹1.50 प्रति लीटर, डीजल पर ₹25 प्रति लीटर और ATF पर ₹19 प्रति लीटर लेवी तय की गई है. इसका सीधा असर देश से इन पेट्रोलियम उत्पादों का एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर पड़ेगा.
अब पेट्रोल, डीजल और ATF पर कितनी लेवी?
नई दरों को आसान तरीके से ऐसे समझें:
| पेट्रोलियम उत्पाद | नई एक्सपोर्ट लेवी | इसमें SAED | RIC |
| पेट्रोल | ₹1.50/लीटर | ₹1.50 | ₹0 |
| डीजल | ₹25/लीटर | ₹24 | ₹1 |
| ATF | ₹19/लीटर | ₹19 | ₹0 |
यानी डीजल पर लगने वाली कुल ₹25 की लेवी में ₹24 SAED यानी स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और ₹1 रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है. वहीं पेट्रोल और ATF पर पूरी लेवी SAED के रूप में है.
15 अगस्त के मुकाबले क्या बदला?
सरकार ने इससे पहले 15 अगस्त को भी इन दरों में बदलाव किया था. उस समय डीजल पर लेवी ₹25.50 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर और ATF पर ₹22 से घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर की गई थी. पेट्रोल पर एक्सपोर्ट लेवी ₹3.50 से घटाकर शून्य कर दी गई थी.
अब 1 सितंबर की समीक्षा में पेट्रोल पर फिर से ₹1.50 प्रति लीटर लेवी लगा दी गई है. डीजल की लेवी ₹24 से बढ़कर ₹25 और ATF की ₹19.50 से घटकर ₹19 प्रति लीटर हो गई है.
सरकार बार-बार लेवी क्यों बदल रही है?
इसका कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की हलचल से है. सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल, डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर यह लेवी व्यवस्था दोबारा लागू की थी. इसका मकसद विदेशों में इन उत्पादों के एक्सपोर्ट को हतोत्साहित करना और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना था.
सरकार इन दरों की हर 15 दिन में समीक्षा करती है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव के हिसाब से लेवी को ऊपर-नीचे किया जाता है.
क्या घरेलू पेट्रोल-डीजल पर भी बढ़ा टैक्स?
नहीं. सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक घरेलू इस्तेमाल के लिए जारी किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
यानी 1 सितंबर का यह बदलाव मुख्य रूप से एक्सपोर्ट लेवी से जुड़ा है. इसे घरेलू पेट्रोल-डीजल पर सीधे नए टैक्स के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
Windfall Tax व्यवस्था फिर क्यों चर्चा में है?
भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद विंडफॉल टैक्स व्यवस्था शुरू की थी. इसमें घरेलू स्तर पर निकाले गए कच्चे तेल के साथ पेट्रोल, डीजल और ATF के एक्सपोर्ट को भी शामिल किया गया था. दिसंबर 2024 में पुरानी व्यवस्था हटा दी गई थी.
इसके बाद पश्चिम एशिया में संकट के बीच वैश्विक तेल कीमतों में फिर तेजी आने पर 27 मार्च 2026 को एक्सपोर्ट लेवी व्यवस्था वापस लाई गई. मई 2026 में पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी शून्य से बढ़ाकर सकारात्मक लेवी लागू की गई. तब से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति के हिसाब से इसकी दरों में कई बार बदलाव हो चुका है.
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