72 डॉलर पर आया ब्रेंट, 69 डॉलर पर WTI! क्या अब और सस्ता होगा कच्चा तेल?

Oil Price Today: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात सामान्य होने और सप्लाई बढ़ने से तेल बाजार को राहत मिली है. जानिए कच्चे तेल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ा है.

Oil Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया, जो अमेरिका-ईरान तनाव शुरू होने से पहले के स्तर के आसपास है. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI भी 69 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखा. इससे दुनिया भर के बाजारों में राहत का माहौल बना है.

क्यों टूट रही हैं तेल की कीमतें?

तेल बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों का पड़ा है. दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत मिलने के बाद इन्वेस्टर्स ने पहले से जुड़ा जोखिम प्रीमियम हटाना शुरू कर दिया है. इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में सप्लाई की स्थिति भी बेहतर होती दिखाई दे रही है. तनाव के दौरान जिन तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, वे अब फिर से सामान्य रूप से चलने लगे हैं. 

क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात सुधर रहे हैं?

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात पहले के मुकाबले काफी बेहतर बताए जा रहे हैं. कई टैंकर अब अपने ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखकर इस रास्ते से गुजर रहे हैं, जो सामान्य स्थिति की वापसी का संकेत माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी बताया कि ईरान और ओमान मिलकर हजारों फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम कर रहे हैं. इससे समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं कम हुई हैं. अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 2 करोड़ बैरल से अधिक तेल गुजरा है और तेल प्रवाह लगभग युद्ध-पूर्व स्तर पर पहुंच चुका है. 

सप्लाई बढ़ने से बाजार को कितना सहारा मिला?

एक्स्पर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के प्रोड्यूसर्स की ओर से बाजार में ज्यादा तेल कार्गो उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इससे सप्लाई को लेकर डर कम हुआ है. साथ ही अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट पर कुछ अस्थायी राहत भी दी है. इससे बाजार में अतिरिक्त तेल आने की संभावना बढ़ी है.

  • 15 जून वाले सप्ताह में मिडिल ईस्ट खाड़ी से 67.9 लाख बैरल तेल की शिपमेंट हुई.
  • यह 1 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है.
  • बाजार में उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

आगे क्या रह सकती है दिशा?

हालांकि कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन एक्स्पर्ट्स पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं. अमेरिका के कुशिंग, ओक्लाहोमा स्थित प्रमुख तेल भंडार में स्टॉक घटकर करीब 1.9 करोड़ बैरल रह गया है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बनी हुई है. यदि तनाव और कम होता है तथा सप्लाई सामान्य रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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