Oil Price on 22 June 2026: इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दिया गया सख्त बयान है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल पर फिर हमला किया तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इस बयान के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई और तेल की कीमतें चढ़ गईं.
फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
क्या है तेल की कीमत बढ़ने की वजह?
मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े ऑयल प्रोड्यूसर क्षेत्रों में से एक है. ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव सीधे ऑयल मार्केट को प्रभावित करता है.
मुख्य कारण:
- ट्रंप की ईरान को चेतावनी
- इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष को लेकर चिंता
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अनिश्चितता
- तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका
सोमवार सुबह कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर तक पहुंच गया था, जबकि WTI भी 78 डॉलर के पार चला गया था.
स्विट्जरलैंड में क्या चल रही है बातचीत?
तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय बातचीत शुरू हुई है. इस बैठक में कतर और पाकिस्तान भी मीडिएटर की भूमिका निभा रहे हैं.हालांकि शुरुआत में ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि ट्रंप के बयान के बाद बातचीत रोक दी गई है, लेकिन बाद में सूत्रों ने बताया कि चर्चा देर रात तक जारी रही.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम क्यों?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा के रास्ते में से एक माना जाता है. ग्लोबल लेवल पर तेल और एलएनजी (LNG) की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है.
अगर यहां कोई रुकावट आती है तो:
- ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हो सकती है
- कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
- कई देशों में फ्यूल महंगा हो सकता है
हालांकि ईरान की ओर से बंद करने के दावों के बावजूद सप्ताहांत में लाखों बैरल कच्चा तेल इस मार्ग से गुजरता रहा.
आगे क्या हो सकता है?
बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान बातचीत के नतीजों पर टिकी है. यदि शांति समझौता होता है तो तेल आपूर्ति बढ़ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 8 करोड़ बैरल कच्चा तेल फारस की खाड़ी में टैंकरों पर मौजूद है, जो होर्मुज से गुजरने की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. इसके अलावा कुवैत और अबू धाबी के बड़े ऑयल प्रोड्यूसर भी एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. फिलहाल ऑयल मार्केट में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीतिक बातचीत तनाव कम करेगी या फिर नए बयान और घटनाएं कीमतों को और ऊपर ले जाएंगी.
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