NPS vs Mutual Fund: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय अक्सर लोग उलझ जाते हैं कि पैसा NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में डालें या Mutual Funds में. सच तो यह है कि ये दोनों ही निवेश अलग-अलग तरह के लोगों के लिए बने हैं. असली सवाल यह नहीं है कि पैसा कहां ज्यादा बनेगा, बल्कि यह है कि आपकी जरूरत क्या है.
क्या आप अपनी बचत को लेकर अनुशासित हैं?
NPS का सबसे बड़ा फायदा इसकी सख्ती है. इसमें पैसा एक बार गया, तो रिटायरमेंट (60 साल) से पहले उसे निकालना बहुत मुश्किल है. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बार-बार अपने निवेश से पैसा निकाल लेते हैं या बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर डर जाते हैं. NPS आपको मजबूर करता है कि आप अपने बुढ़ापे के लिए अनुशासित रहें. वहीं, म्यूचुअल फंड में पूरी आजादी होती है, जिसे संभालने के लिए खुद पर नियंत्रण होना बहुत जरूरी है.
क्या आपको टैक्स बचत चाहिए या कंट्रोल?
NPS में आपको निवेश के समय टैक्स में एक्स्ट्रा छूट मिलती है, जो बहुत लुभावनी लगती है. लेकिन याद रहे, रिटायरमेंट के बाद जो पेंशन (Annuity) आपको मिलेगी, उस पर आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड में शुरुआत में कोई टैक्स छूट नहीं मिलती, लेकिन इसमें टैक्स कंट्रोल आपके हाथ में होता है. आप जब चाहें पैसा निकालें और सिर्फ मुनाफे पर टैक्स दें.
क्या आप रिस्क लेकर ज्यादा पैसा बनाना चाहते हैं?
अगर आप जवान हैं और रिस्क ले सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड आपको लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं. यहां आप अपना पूरा पैसा इक्विटी (शेयर बाजार) में रख सकते हैं. NPS में रिस्क को कंट्रोल किया जाता है और उम्र के साथ इक्विटी का हिस्सा कम कर दिया जाता है. NPS का मकसद आपको अमीर बनाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य देना है.
जरूरत पड़ने पर पैसा क्या तुरंत मिल पाएगा?
रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ घर बैठना नहीं है, कभी बीमारी तो कभी बच्चों की शादी के लिए बड़े फंड की जरूरत पड़ सकती है. यहां म्यूचुअल फंड बाजी मार ले जाते हैं क्योंकि ये लिक्विड होते हैं यानी आप जब चाहें पैसा निकाल सकते हैं. NPS में पैसा लॉक हो जाता है, जो अनुशासन के लिए तो अच्छा है, लेकिन इमरजेंसी में आपके हाथ बांध सकता है.
