नरेंद्र मोदी सरकार में धान और गेहूं का इतना बढ़ गया समर्थन मूल्य, 2023-24 का MSP यहां चेक करें

नरेंद्र मोदी सरकार में पिछले 7 साल में धान के MSP में 570 रुपये की वृद्धि कर चुकी है. गेहूं के समर्थन मूल्य में 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है. वर्ष 2016-17 में धान का समर्थन मूल्य 1,470 रुपये तय किया गया था, जबकि गेहूं का 1,625 रुपये. अब गेहूं का समर्थन मूल्य 2,125 रुपये हो गया है.

नरेंद्र मोदी की सरकार ने किसानों को खुशखबरी दी है. वर्ष 2023-24 के लिए खरीफ (Kharif) और रबी (Rabi) की फसलों का समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) जारी कर दिया है. धान के समर्थन मूल्य में 100 रुपये की वृद्धि की गयी है, जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य 110 रुपये बढ़ाया गया है. मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से लगातार समर्थन मूल्य बढ़ा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लागत मूल्य पर किसानों को 50 फीसदी मुनाफा देने की घोषणा की थी.

गेहूं की खरीद 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी

वर्ष 2023-24 के लिए खरीफ एवं रबी फसलों का जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जारी किया गया है, उसमें गेहूं की खरीद 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जायेगी. बारली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,735 रुपये तय किया गया है, जबकि चना का 5,335 रुपये, मसूर का 6,000 रुपये, रेपसीड एवं सरसों का 5,450 रुपये और कुसम का 5,650 रुपये तय किया गया है.

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धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 570 रुपये बढ़ा

सरकार ने वर्ष 2022-23 की धान की फसल का मूल्य 2,040 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इस तरह पिछले 7 साल में सरकार धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 570 रुपये की वृद्धि कर चुकी है. वहीं, गेहूं के समर्थन मूल्य में इसी कालखंड में 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है. वर्ष 2016-17 में धान का समर्थन मूल्य 1,470 रुपये तय किया गया था, जबकि गेहूं का 1,625 रुपये. अब गेहूं का समर्थन मूल्य 2,125 रुपये हो गया है.

दलहन और तिलहन का भी समर्थन मूल्य बढ़ा

दलहन और तिलहन के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की गयी है. चना, मसूर और रेपसीड एवं सरसों की कीमतों में पिछले सात सालों में क्रमश: 1,335 रुपये, 2,150 रुपये और 1,750 रुपये की वृद्धि की गयी है. चना की कीमतों में 105 रुपये की वृद्धि करके 5,335 रुपये कर दी गयी है, जो वर्ष 2016-17 में 4,000 रुपये थी.

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मसूर की कीमतों में सबसे ज्यादा 500 रुपये की वृद्धि

मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा 500 रुपये (9.1 फीसदी) की वृद्धि की वृद्धि की गयी है. इस तरह वर्ष 2023-24 में मसूर का समर्थन मूल्य 6,000 रुपये हो गया है, जो वर्ष 2016-17 में 3,950 रुपये था. इसी तरह रेपसीड एवं सरसों की कीमतों में 400 रुपये की वृद्धि कर दी गयी है. अब इसका समर्थन मूल्य 5,450 रुपये हो गया है, जो वर्ष 2016-17 में 3700 रुपये था. इस तरह मसूर का समर्थन मूल्य 7 साल में 2,150 रुपये बढ़ गया, जबकि रेपसड एवं सरसों तेल का मूल्य 1,750 रुपये और चना का मूल्य 1,335 रुपये बढ़ चुका है.

खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य
धान 2040
ज्वार 2060
बाजरा 2350
रागी 3578
मक्का 1962
तुअर (अरहर) 6600
मूंग 7755
उड़द 6600
मूंगफली 5850
सनफ्लावर बीज 6400
सोयाबीन (पीला) 4300
सेसामम 7830
नाइजर सीड 7287
कपास 6080
गेहूं 2125
बरेली 1735
दाल 5335
मसूर (लेंटिल) 6000
रेपसीड एवं सरसों 5450
कुसुम 5650
तोरिया
कोपरा (नारियल) 10590
छिलके वाला नारियल 2860
जूट 4750

अरहर, मूंग और उड़द के कितने बढ़े दाम

अरहर, मूंग और उड़द के मूल्य में अब तक क्रमश: 1,550 रुपये, 2530 रुपये और 1600 रुपये की वृद्धि हो चुकी है. अरहर का सर्थन मूल्य सरकार ने 6,600 रुपये कर दिया है, जो वर्ष 2016-17 में 1,550 रुपये था. मूंग का समर्थन मूल्य 7,755 रुपये तय किया गया है, जो वर्ष 2016-17 में 5,225 रुपये था. उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,600 रुपये होगा, जो वर्ष 2016-17 में 5,000 रुपये था.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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