Mutual Fund Investment Mistakes: जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो अच्छे-अच्छे निवेशकों के पसीने छूट जाते हैं. आजकल मिडिल ईस्ट के तनाव और ग्लोबल हलचल की वजह से मार्केट काफी ऊपर-नीचे हो रहा है. ऐसे में घबराहट होना लाजमी है, लेकिन याद रखिये बाजार की इस जंग में जीतता वही है जो शांत रहता है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, पॉल सैमुअलसन ने बड़ी पते की बात कही थी कि निवेश करना घास को बढ़ते हुए देखने जैसा है, जिसमें धैर्य चाहिए. अगर आपको रोमांच चाहिए, तो जुआ खेलिए, निवेश नहीं. आइए जानते हैं कि इस उतार-चढ़ाव में आपको किन गलतियों से बचना है.
क्या आप भी डर के मारे पोर्टफोलियो खाली कर रहे हैं?
बाजार गिरते ही सबसे बड़ी गलती होती है पैनिक सेलिंग यानी घबराहट में अपने म्यूचुअल फंड बेचना. जब आप गिरते बाजार में पैसा निकालते हैं, तो आप अपना घाटा पक्का (Lock-in) कर लेते हैं. याद रखिए, बाजार का स्वभाव ही गिरकर संभलना है. जो निवेशक टिके रहते हैं, वही लंबी अवधि में मुनाफा कमाते हैं.
क्या आप बार-बार फंड बदल रहे हैं?
कई लोग बाजार की हलचल देखकर बार-बार अपना पैसा एक फंड से निकालकर दूसरे में डालते रहते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपको अपने पुराने एसेट एलोकेशन (जैसे 70% इक्विटी और 30% डेट) पर टिके रहना चाहिए. बार-बार बदलाव करने से ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ती है और रिटर्न कम हो जाता है.
क्या गिरते मार्केट में SIP रोकना सही है?
सबसे बड़ी भूल है अपनी SIP (Systematic Investment Plan) को बंद करना. हकीकत में गिरता हुआ बाजार आपके लिए सेल (Sale) की तरह है. जब मार्केट गिरता है, तो आपको उतने ही पैसों में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. SIP रोकने का मतलब है कि आप कम कीमत पर खरीदारी करने का सुनहरा मौका हाथ से गंवा रहे हैं.
क्या आप ‘मार्केट टाइमिंग’ के चक्कर में फंसे हैं?
कोई भी यह नहीं बता सकता कि बाजार कब सबसे नीचे गिरेगा या कब ऊपर जाएगा. लोग सोचते हैं कि जब बाजार एकदम गिर जाएगा तब पैसा लगाएंगे, लेकिन अक्सर वो सही समय निकल जाता है और लोग ऊंचे दाम पर खरीदारी कर बैठते हैं. बाजार कब गिरेगा या कब बढ़ेगा इसका अंदाजा लगाने के चक्कर में न पड़ें; बल्कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर ध्यान दें.
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