Moonlighting से क्यों घबराई हैं IT कंपनियां? क्या है ये और कहां से आया यह ट्रेंड?

Why IT Companies Worry About Moonlighting: आईटी कंपनी विप्रो ने नियमित के साथ दूसरी नौकरी करनेवाले अपने 300 कर्मचारियों को पिछले ही दिनों नौकरी से हटा दिया. वहीं, इंफोसिस ने भी मूनलाइटिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.

What Is Moonlighting: ‘मूनलाइटिंग’ शब्द इन दिनों खूब चर्चा में है. नियमित नौकरी के अलावा, साइड जॉब का चलन इधर काफी बढ़ा है. यह बात अलग है कि पहले भी कर्मचारी ऐसा करते रहे हैं, लेकिन जब नौकरी देनेवालों को इसके बारे में पता चलता है, तो वे कर्मचारियों पर सख्ती बरतते हैं. पिछले ही दिनों आईटी कंपनी विप्रो ने नियमित के साथ दूसरी नौकरी करनेवाले अपने 300 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया. वहीं, इंफोसिस ने भी मूनलाइटिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. मूनलाइटिंग से आइटी कंपनियां ही नहीं, बल्कि टीचिंग, डिजाइनिंग, वीडियाे एडिटिंग, सेल्स, मार्केटिंग समेत कई ऐसे क्षेत्र जूझ रहे हैं. यह मूनलाइटिंग क्या है? कर्मचारियों के बीच इसका चलन क्यों बढ़ रहा है? आइए जानें-

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Published by: Rajeev kumar

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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