Milk Price Hike: कर्नाटक में त्योहारों से पहले आम लोगों पर महंगाई का एक और असर पड़ सकता है. राज्य के दूध उत्पादक संघों ने दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की है. यह मांग बेंगलुरु प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाई गई. उत्पादकों का कहना है कि पशु चारा, कच्चे माल, ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत के कारण डेयरी किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है.
दूध उत्पादकों ने राज्य सरकार को इस मामले में 3 दिन का समय दिया है. उनका कहना है कि अगर इस दौरान कैबिनेट बैठक बुलाकर उनकी मांग पर फैसला नहीं लिया गया, तो वे विरोध तेज करते हुए विधान सौध तक मार्च निकाल सकते हैं.
दूध की कीमत बढ़ाने की मांग क्यों उठी?
कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, किसानों की लागत बढ़ रही है, जबकि दूध के लिए उन्हें मिलने वाली कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है. संघों ने दूध की खरीद कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ सरकार से मिलने वाले इंसेंटिव को भी बढ़ाने की मांग की है.
फिलहाल सरकार की ओर से दूध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर इंसेंटिव दिया जाता है. संघ इसे बढ़ाकर 8 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं.
उत्पादकों का दावा है कि बामुल, चामुल, मांड्या मिल्क और तुमकुर समेत राज्य के कई बड़े दूध संघ इस मांग के समर्थन में हैं.
चारा और पशु आहार की बढ़ती लागत का कितना असर?
डेयरी संघों ने दूध उत्पादन की लागत बढ़ने के पीछे कई वजहें बताई हैं. उनके मुताबिक, कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण हरे चारे की कमी हुई है. इसके अलावा पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले मक्का, चोकर और शीरे जैसे कच्चे माल की कीमत करीब 25% तक बढ़ी है.
बछड़ों के बिछावन के सामान के साथ-साथ ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ने की बात कही गई है. उत्पादकों का कहना है कि इन बढ़ती लागतों के कारण किसानों के लिए मवेशियों को पालना मुश्किल होता जा रहा है.
क्या कर्नाटक में दूध का उत्पादन भी घटा है?
दूध उत्पादक संघों ने उत्पादन में गिरावट का भी मुद्दा उठाया है. उनके मुताबिक, कर्नाटक में पहले रोजाना करीब 1.11 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता था, जो अब घटकर करीब 1.05 करोड़ से 1.06 करोड़ लीटर प्रतिदिन रह गया है.
बामुल मिल्क यूनियन के प्रेसिडेंट नागराज के मुताबिक, डेयरी संघ पिछले 8 महीनों से राज्य सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. उनका कहना है कि लागत बढ़ने और उत्पादन घटने का असर आगे चलकर दूध की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है.
अगर 8 रुपये बढ़े तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो कर्नाटक में दूध के दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर पड़ेगा.
खासकर नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान इसका असर केवल पैकेट वाले दूध तक सीमित नहीं रह सकता. दूध से बनने वाली मिठाई, खोया और दूसरे डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है.
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है. कर्नाटक के दूध उत्पादक संघों की नजर अब अगले तीन दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया पर है.
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