बाजार की सुबह रही फीकी, सेंसेक्स 93 अंक लुढ़का, निफ्टी 72 पॉइंट्स डाउन

भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट दिखी. सेंसेक्स 93 अंक और निफ्टी 72 अंक फिसले. जानें क्रूड, ग्लोबल संकेत और एक्सपर्ट की राय क्या है.

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों का मूड थोड़ा कमजोर किया. BSE सेंसेक्स 93.51 अंक यानी 0.12% गिरकर 77,872.84 पर पहुंच गया. वहीं NSE निफ्टी 50 में 71.65 अंक यानी 0.29% की गिरावट रही और यह 24,364.30 पर कारोबार करता दिखा.

हालांकि, बाजार में गिरावट के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति और लगातार आ रही घरेलू निवेशकों की रकम बाजार को सहारा दे रही है.

बाजार पर अभी दबाव क्यों है?

Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट VK विजयकुमार के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार में कंसोलिडेशन और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. यानी शेयर बाजार में फिलहाल एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है.

उन्होंने कहा कि बाजार को मजबूत ग्रोथ, कंपनियों की कमाई और घरेलू निवेशकों से लगातार मिल रही लिक्विडिटी से सपोर्ट मिल रहा है. GST कलेक्शन, माल ढुलाई, ऑटो बिक्री और क्रेडिट ग्रोथ जैसे आंकड़े भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं.

कच्चे तेल की कीमतों का क्या असर है?

बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता अभी कच्चे तेल की कीमतें बनी हुई हैं. रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड 0.79 डॉलर यानी 0.89% गिरकर 88.19 डॉलर प्रति बैरल पर था. वहीं क्रूड ऑयल 0.87 डॉलर यानी 1.05% की गिरावट के साथ 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

VK विजयकुमार ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग को लेकर बनी दिक्कतों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण क्रूड की कीमतों में जोखिम बना हुआ है. बाजार को फिलहाल इस समस्या के जल्दी खत्म होने का भरोसा नहीं है.

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ग्लोबल बाजार से क्या संकेत मिले?

अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. नैस्डैक 143.04 अंक चढ़कर 26,588.49 पर पहुंचा, जबकि S&P 500 में 20.30 अंक की बढ़त रही और यह 7,748.50 पर बंद हुआ. दूसरी ओर डाउ जोंस 0.04% फिसलकर 53,749 पर रहा. HSL Prime Research के देवरश वकील के अनुसार, जुलाई में अमेरिका की हेडलाइन CPI महंगाई 3.4% रही, जो बाजार के अनुमान के मुताबिक थी. जून में यह 3.5% थी. कोर CPI 2.5% पर बनी रही. महंगाई के आंकड़ों के बाद सितंबर में अमेरिकी फेड की आक्रामक कार्रवाई की उम्मीद कुछ कम हुई. इसका असर सोने पर भी दिखा और गोल्ड 4,400 डॉलर के ऊपर पहुंच गया. रिपोर्टिंग के समय सोना 0.01% की मामूली बढ़त के साथ 4,409.19 डॉलर पर था.

निवेशकों के लिए अभी क्या रणनीति है?

VK विजयकुमार के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में निवेशकों को बाजार की छोटी अवधि की हलचल से घबराने के बजाय लगातार और व्यवस्थित तरीके से निवेश जारी रखने पर ध्यान देना चाहिए. मजबूत घरेलू लिक्विडिटी और ग्रोथ के संकेत बाजार के लिए सपोर्ट बने हुए हैं, जबकि क्रूड की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है.

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By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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