LPG Crisis: गुजरात का मोरबी, जिसे देश का सबसे बड़ा सिरेमिक (टाइल्स) हब माना जाता है, इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है. वेस्ट एशिया में जारी Iran–US–Israel conflict की वजह से गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर यहां की फैक्ट्रियों पर पड़ा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, मोरबी की करीब 430 सिरेमिक यूनिट्स ने कम से कम तीन हफ्तों के लिए अपने प्लांट बंद करने का फैसला लिया है. इससे पहले ही करीब 450 फैक्ट्रियां गैस की कमी के कारण बंद हो चुकी थीं. यानी कुल मिलाकर ज्यादातर यूनिट्स पर ताला लग चुका है और आने वाले दिनों में और फैक्ट्रियां भी बंद हो सकती हैं.
गैस पर पूरी तरह निर्भर है इंडस्ट्री
मोरबी का सिरेमिक इंडस्ट्री प्रोपेन और नेचुरल गैस पर काफी हद तक निर्भर करता है. टाइल्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली भट्टियां (किल्न) और ड्राइंग प्रोसेस पूरी तरह गैस से चलते हैं. ऐसे में जैसे ही गैस की सप्लाई रुकी, उत्पादन ठप हो गया. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सबसे पहले प्रोपेन से चलने वाली यूनिट्स बंद हुईं और अब नेचुरल गैस पर निर्भर फैक्ट्रियां भी धीरे-धीरे बंद हो रही हैं.
कब तक बंद रहेंगी फैक्ट्रियां ?
मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के मुताबिक, इन यूनिट्स ने 10 से 15 अप्रैल तक बंद रहने का फैसला किया है. इस दौरान फैक्ट्री मालिक मशीनों की मेंटेनेंस करेंगे और गैस सप्लाई सामान्य होने का इंतजार करेंगे. अगर तब तक गैस की सप्लाई ठीक नहीं हुई, तो बंदी का समय और बढ़ सकता है.
सरकार ने बदले गैस सप्लाई के नियम
गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 लागू किया है. इसके तहत अब गैस की सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटा जा रहा है.
सबसे पहले गैस दी जा रही है.
- घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG
- गाड़ियों के लिए CNG
- LPG उत्पादन
- जरूरी पाइपलाइन ऑपरेशन
वहीं, इंडस्ट्रियल सेक्टर को उनकी जरूरत का करीब 80% गैस ही मिल रही है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है. कुछ सेक्टर्स जैसे पेट्रोकेमिकल और पावर सेक्टर में गैस सप्लाई और भी कम कर दी गई है.
क्या होगा असर ?
मोरबी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक टाइल उत्पादन केंद्र है. ऐसे में यहां फैक्ट्रियां बंद होने का असर सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे देश और एक्सपोर्ट मार्केट पर भी पड़ सकता है. कुल मिलाकर, गैस संकट ने सिरेमिक इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि गैस सप्लाई कब तक सामान्य होती है और फैक्ट्रियां फिर से कब चालू हो पाती हैं.
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