Airplane Windows: अमेरिकी विमानन नियामक FAA (Federal Aviation Administration) के मुताबिक, विमान की खिड़कियों का गोल या ओवल होना एक अहम इंजीनियरिंग फैसला है. इससे विमान की बॉडी पर पड़ने वाला दबाव बेहतर तरीके से संभलता है और किसी एक जगह जरूरत से ज्यादा तनाव नहीं बनता.
आखिर गोल या ओवल खिड़कियां ही क्यों?
विमान का फ्यूजलेज यानी उसकी मुख्य बॉडी उड़ान के दौरान लगातार दबाव झेलती है. ऐसे में जहां भी कोई कट या खुला हिस्सा होता है, जैसे खिड़की, वहां दबाव का असर ज्यादा पड़ सकता है. FAA के अनुसार, गोल या ओवल किनारे दबाव को पूरे हिस्से में आसानी से फैला देते हैं. इससे किसी एक जगह ज्यादा तनाव नहीं बनता. इसके उलट, अगर खिड़की के कोने तेज और चौकोर हों, तो उन कोनों पर बाकी हिस्सों की तुलना में काफी ज्यादा दबाव जमा हो सकता है. इसे Stress Concentration कहा जाता है.
कॉमेट विमान से क्या सीख मिली?
FAA के रिकॉर्ड बताते हैं कि de Havilland Comet विमान की जांच और परीक्षण के दौरान एक बड़ी बात सामने आई थी. इस विमान की कुछ हद तक चौकोर खिड़कियों के आसपास उम्मीद से ज्यादा तनाव पाया गया. जांच में पता चला कि खिड़की के कोनों पर लगातार ज्यादा दबाव बनने की वजह से वहां धीरे-धीरे Fatigue (धातु की थकान) बढ़ने लगी. अगर यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहे, तो विमान की बॉडी में बड़ी दरार या गंभीर टूट-फूट (Catastrophic Fuselage Rupture) तक हो सकती है.
बार-बार उड़ान भरने से क्या होता है?
हर बार जब विमान उड़ान भरता है और फिर जमीन पर आता है, तो उसकी प्रेसराइज्ड बॉडी पर दबाव बढ़ता और घटता है. इसे Pressure Cycle कहा जाता है. FAA का कहना है कि ऐसे हजारों प्रेशर साइकल के दौरान अगर किसी हिस्से पर पहले से ज्यादा तनाव हो, तो समय के साथ वह हिस्सा कमजोर पड़ सकता है. इसलिए आज विमान बनाने वाली कंपनियां Fatigue Testing करती हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल के बाद भी विमान सुरक्षित रहेगा या नहीं.
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