कर्नाटक की महिलाओं को हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता देने वाली गृहलक्ष्मी योजना (Gruha Lakshmi Scheme) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. गृहलक्ष्मी योजना कर्नाटक की महिलाओं के लिए हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करती है. इस योजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. कर्नाटक सरकार ने योजना के सभी लाभार्थियों का नए सिरे से सत्यापन कराने का फैसला लिया है. री-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 30 अगस्त 2026 से शुरू करने और करीब एक महीने में इसे पूरा करने की योजना है. इस दौरान लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.
घर-घर पहुंचकर होगा लाभार्थियों का सत्यापन
सरकार की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन घर-घर जाकर किया जाएगा. इसके अलावा Grama One, Karnataka One, Bengaluru One और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), जिन्हें बापूजी सेवा केंद्र भी कहा जाता है, में भी सत्यापन की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इसके लिए नागरिक सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी (EDCS) निदेशालय द्वारा तैयार वेब और मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा.
सत्यापन के दौरान मिलेगा प्रिंटेड फॉर्म
डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन के दौरान लाभार्थी को एक प्रिंटेड एन्यूमरेशन फॉर्म दिया जाएगा. सत्यापन की प्रक्रिया में लाभार्थी की तस्वीर ली जाएगी और एप्लिकेशन के जरिए घर की GPS लोकेशन भी रिकॉर्ड की जाएगी. सरकार ने घर के सत्यापन के साथ फॉर्म का वितरण और बाद में उसे वापस लेने की प्रक्रिया को भी अनिवार्य किया है.
घर पर नहीं मिले तो इन केंद्रों पर करा सकेंगे सत्यापन
यदि अधिकारी घर पहुंचने के दौरान किसी लाभार्थी को नहीं पाते हैं, तो उसे दोबारा सत्यापन के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं होगी. ऐसे लाभार्थी अपने निर्धारित फेयर प्राइस शॉप या नजदीकी Karnataka One, Grama One अथवा Bengaluru One सेंटर पर जाकर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन करा सकेंगे.
मृत और अपात्र लाभार्थियों की होगी पहचान
सरकार के री-वेरिफिकेशन का मुख्य उद्देश्य गृहलक्ष्मी योजना के रिकॉर्ड को अपडेट करना है. इस प्रक्रिया के दौरान मृत लाभार्थियों, दूसरे स्थान पर चले गए लोगों, डुप्लीकेट लाभार्थियों और अन्य अपात्र लोगों की पहचान की जाएगी. इसके साथ ही यह भी जांच होगी कि किसी लाभार्थी या उसके पति ने योजना में शामिल होने के बाद इनकम टैक्स या GST रिटर्न दाखिल करना शुरू तो नहीं किया है.
यह री-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करेगा कि योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिले जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, और किसी भी तरह की गड़बड़ी या दुरुपयोग को रोका जा सके.
जैसे कि बेंगलुरु की राधिका, जो अपने बच्चों की ट्यूशन फीस का भुगतान करने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल करती हैं, उनके लिए ₹2,000 की यह मदद किसी वरदान से कम नहीं है. हर महीने मिलने वाली यह रकम उनके परिवार की पढ़ाई-लिखाई की जरूरतों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होती है.
हर महीने मिलते हैं ₹2,000, सालाना ₹24 हजार
गृहलक्ष्मी योजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में शामिल है. इसके तहत पात्र महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है. इस तरह एक लाभार्थी को साल में कुल ₹24,000 मिलते हैं. योजना की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है.
किन महिलाओं को मिलता है योजना का लाभ?
यह आर्थिक सहायता उन महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने कुछ पात्रता मानदंड तय किए हैं. योजना के तहत अंत्योदय, BPL या APL राशन कार्ड में परिवार की मुखिया के तौर पर दर्ज पात्र महिलाओं को लाभ दिया जाता है. एक परिवार से केवल एक महिला इस आर्थिक सहायता का लाभ ले सकती है. नियमों के तहत विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अन्य पात्र महिलाएं योजना के दायरे में आ सकती हैं, बशर्ते वे राशन कार्ड में परिवार की मुखिया के रूप में दर्ज हों.
इन परिवारों को नहीं मिलेगा ₹2,000 का लाभ
जिन परिवारों में परिवार का मुखिया या पति इनकम टैक्स भरता है या GST रिटर्न दाखिल करता है, वे गृहलक्ष्मी योजना के लिए पात्र नहीं माने जाते हैं. सरकार का उद्देश्य पात्रता की इन शर्तों के जरिए आर्थिक रूप से जरूरतमंद परिवारों तक योजना की सहायता पहुंचाना है.
आधार से बैंक खाता लिंक होना जरूरी
गृहलक्ष्मी योजना की राशि DBT के जरिए लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाती है. इसलिए योजना का लाभ पाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार आधार और बैंक खाते की लिंकिंग जरूरी है. योजना के तहत मिलने वाली राशि का इस्तेमाल महिलाएं घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार की अन्य जरूरतों के लिए कर सकती हैं.
DBT का पैसा आया या नहीं, ऐसे करें चेक
लाभार्थी महिलाएं यह भी जांच सकती हैं कि गृहलक्ष्मी योजना की राशि उनके बैंक खाते में जमा हुई है या नहीं. इसके लिए DBT Karnataka Mobile Application और SMS के जरिए स्टेटस चेक करने की सुविधा उपलब्ध है. मोबाइल ऐप के माध्यम से भुगतान की स्थिति जानने के लिए कर्नाटक सरकार के DBT मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है.
री-वेरिफिकेशन के बाद क्या बदलेगा?
री-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद सरकार के पास गृहलक्ष्मी योजना के लाभार्थियों का ज्यादा अपडेटेड रिकॉर्ड उपलब्ध होने की उम्मीद है. इससे मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाने में मदद मिलेगी. साथ ही सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि योजना का लाभ सही और पात्र महिलाओं तक पहुंचता रहे.
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