ITR भरने से पहले कर लें हिसाब! Old Tax Regime या New, किसमें बचेगा ज्यादा पैसा?

ITR Filing Tips: पुराना टैक्स सिस्टम बेहतर है या नया? जानें ITR फाइल करते समय सही रिजीम कैसे चुनें और अपना टैक्स बचाएं.

ITR Filing Tips: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की तारीख नजदीक है. हर टैक्सपेयर के मन में एक ही सवाल है कि पुराना टैक्स सिस्टम (Old Regime) बेहतर है या नया (New Regime)? यह फैसला आपकी कमाई और खर्चों पर निर्भर करता है. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. 

नया टैक्स सिस्टम क्या है और यह क्यों फायदेमंद है?

आजकल नया टैक्स सिस्टम ‘डिफॉल्ट’ ऑप्शन है. यानी अगर आप खुद नहीं चुनते, तो सरकार आपको इसी में मान लेगी. अच्छी बात यह है कि अब 12 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर टैक्स का बोझ न के बराबर है. अगर आप नौकरीपेशा हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन (50,000 रुपये) का फायदा लेते हैं, तो यह लिमिट 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. कम टैक्स रेट और सीधे-सादे कैलकुलेशन की वजह से कम आय वालों के लिए यह एक ‘नो-ब्रेनर’ यानी सबसे आसान ऑप्शन बन गया है. 

पुराना सिस्टम कब फायदे का सौदा है?

पुराने सिस्टम में आपको हाउस रेंट अलाउंस (HRA), होम लोन का ब्याज (Section 24b), और इनवेस्टमेंट (जैसे 80C, 80D) पर कई तरह की छूट मिलती है. अगर आपका इनवेस्टमेंट और खर्च ज्यादा है, तभी पुराना सिस्टम चुनें. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपकी कुल छूट (Deductions) 3 से 4 लाख रुपये के बीच है, तभी पुराने सिस्टम में आपको नए के मुकाबले ज्यादा फायदा मिल सकता है. वरना, ऊंची टैक्स दरों के कारण आप ज्यादा टैक्स भरेंगे. 

बदलाव करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • ऑफिस को जानकारी दें: अगर आप पुराना सिस्टम चुनना चाहते हैं, तो इसकी जानकारी अपने ऑफिस (HR) को समय पर जरूर दें.
  • बिजनेस इनकम वालों के लिए नियम: अगर आपकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से है, तो आप हर साल सिस्टम नहीं बदल सकते. एक बार नया रिजीम छोड़ने के बाद, वापस आना बहुत मुश्किल होता है. 
  • नया रिजीम और छूट: नए सिस्टम में आप HRA या NPS की हर छूट नहीं ले सकते. यहां सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन और किराये पर दिए गए घर के लोन पर ब्याज जैसी कुछ ही छूट मिलती है. 
  • ITR फाइल करना न भूलें: टैक्स चाहे जीरो हो, लेकिन अगर आपकी कमाई बेसिक छूट सीमा (नए सिस्टम में 4 लाख) से ज्यादा है, तो ITR फाइल करना अनिवार्य है. देरी करने पर भारी पेनल्टी लग सकती है.

क्या आप अपना टैक्स सही तरह से कैलकुलेट कर रहे हैं?

फैसला लेने से पहले अपनी सैलरी स्लिप और इन्वेस्टमेंट को ध्यान से देखें. अपनी कुल छूट का योग निकालें और उसे दोनों सिस्टम में कंपेयर करें. अगर आप बहुत ज्यादा इनवेस्टमेंट नहीं करते हैं, तो नया रिजीम ही आपके लिए सबसे सरल और किफायती ऑप्शन है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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