ITR Filing After Job Change: इंकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सीजन शुरू हो चुका है और लाखों नौकरीपेशा लोग अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स जुटाने में लगे हैं. लेकिन जिन लोगों ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान नौकरी बदली है, उनके लिए ITR फाइल करते समय थोड़ी अतिरिक्त सावधानी जरूरी है. ऐसे एम्प्लॉयीज को एक से ज्यादा Form 16 मिल सकते हैं और अगर सही जानकारी नहीं दी गई तो बाद में टैक्स बकाया या नोटिस जैसी परेशानी भी आ सकती है.
क्या एक से ज्यादा Form 16 मिलना सामान्य है?
हां, अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो यह बिल्कुल सामान्य बात है. मान लीजिए आपने अप्रैल से सितंबर तक एक कंपनी में काम किया और अक्टूबर में दूसरी कंपनी जॉइन कर ली. ऐसे में दोनों कंपनियां अपने-अपने कार्यकाल के लिए अलग-अलग Form 16 जारी करेंगी. ध्यान देने वाली बात यह है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी पुरानी कंपनी की जिम्मेदारी रहती है कि वह एम्प्लॉयी को Form 16 उपलब्ध कराए.
Form 16 आखिर होता क्या है?
Form 16 एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसमें एम्प्लॉयी की सैलरी, टैक्स कटौती (TDS), छूट और कटौतियों की पूरी जानकारी होती है. ITR भरते समय यह सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स में से एक माना जाता है.
| डॉक्यूमेंट्स | काम |
| Form 16 | सैलरी और TDS की जानकारी |
| Form 26AS | जमा किए गए टैक्स का रिकॉर्ड |
| AIS | आय से जुड़ी विस्तृत जानकारी |
| TIS | टैक्स से जुड़ा सारांश |
कई Form 16 मिलने पर क्या करना चाहिए?
अगर आपको एक से ज्यादा Form 16 मिले हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. अलग-अलग रिटर्न भरने की आवश्यकता नहीं होती.
इन बातों का ध्यान रखें:
- सभी कंपनियों से मिले Form 16 इकट्ठा करें.
- सभी Form 16 में दर्ज सैलरी को जोड़ें.
- अलग-अलग कंपनियों द्वारा काटे गए TDS को मिलाएं.
- बैंक ब्याज, कैपिटल गेन या दूसरे इंकम भी शामिल करें.
- Form 26AS, AIS और TIS से जानकारी का मिलान जरूर करें.
- पूरी आय को जोड़कर केवल एक ITR दाखिल करें.
नौकरी बदलने वालों की सबसे बड़ी गलती क्या है?
कई एम्प्लॉयी अपनी पुरानी नौकरी की इंकम को नई कंपनी को नहीं बताते. ऐसे में नया एम्प्लॉयर केवल अपनी तरफ से दी जा रही सैलरी पर TDS काटता है. इससे पूरे साल में कम टैक्स कट सकता है और ITR भरते समय अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है. इसके लिए एम्प्लॉयी नई कंपनी को Form 12B देकर पुरानी नौकरी की सैलरी और TDS की जानकारी दे सकते हैं. साथ ही, सेक्शन 80C, 80D, 80G, HRA छूट और स्टैंडर्ड डिडक्शन का दावा दो बार करने की गलती भी नहीं करनी चाहिए. अंतिम टैक्स गणना में इनका लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है. अगर पुरानी कंपनी से Form 16 नहीं मिला है, तब भी सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, Form 26AS और AIS की मदद से ITR भरा जा सकता है. हालांकि, Form 16 के लिए पुराने एम्प्लॉयर से संपर्क करना जरूरी है क्योंकि इसे जारी करना उसकी कानूनी जिम्मेदारी है.
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