बीकानेरी भुजिया पर ‘युद्ध’ की मार: निर्यात ठप, लागत में 40% का उछाल और कंटेनरों का संकट

Israel-Iran war Impact: युद्ध की वजह से बीकानेरी नमकीन की सप्लाई चेन टूटी! पाम ऑयल और सोयाबीन महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ी, तो माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी ने निर्यातकों की कमर तोड़ दी है. जानिए क्यों बीकानेर से होने वाला करोड़ों का कारोबार संकट में है.

Israel-Iran war Impact: पूरी दुनिया में मशहूर बीकानेर का नमकीन और पापड़ उद्योग इस समय दोहरी मार झेल रहा है. एक तरफ भीषण गर्मी में कच्चे माल के दाम बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान-इजराइल संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को तोड़ दिया है. जो भुजिया 30 दिन में खाड़ी देशों तक पहुंचती थी, उसे अब सुरक्षित रास्तों से पहुंचने में 60 दिन लग रहे हैं. करोड़ों रुपये का माल बंदरगाहों पर अटका हुआ है, जिससे बीकानेर के व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है.

संकट के 4 मुख्य कारण

माल भाड़े (Freight) में भारी बढ़ोतरी: युद्ध के कारण जहाजों को लंबे और सुरक्षित रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे माल भेजने का खर्च कई गुना बढ़ गया है.

  • कच्चे माल की कीमतों में आग: पिछले एक महीने में खाद्य तेल (पाम ऑयल और सोयाबीन) की कीमतों में 20% तक का उछाल आया है. बीकानेरी नमकीन के लिए यह सबसे जरूरी कच्चा माल है.
  • पैकेजिंग लागत में वृद्धि: पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों के कारण प्लास्टिक और अन्य पैकेजिंग मटेरियल की लागत 30-40% तक बढ़ गई है.
  • वक्त की बर्बादी: कंटेनरों की कमी और रूट बदलने से डिलीवरी का समय दोगुना हो गया है. जो माल 30 दिन में पहुँचता था, अब उसमें 60 दिन लग रहे हैं.

बीकानेर के एक्सपोर्ट का गणित

बीकानेर से हर महीने बड़ी मात्रा में नमकीन और अन्य उत्पाद विदेशों में भेजे जाते हैं:

  • नमकीन/पापड़: हर महीने लगभग 15 से 20 कंटेनर का निर्यात.
  • अन्य उत्पाद: लगभग 60 कंटेनर मसाले और अन्य सामान.
  • वर्तमान स्थिति: युद्ध के कारण इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा रुक गया है और करोड़ों की खेप रास्तों या बंदरगाहों पर फंसी है.

भीखाराम ग्रुप के आशीष अग्रवाल ने बताया कि कच्चे माल और ढुलाई की लागत बढ़ने से उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है. खाद्य तेल की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है.

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By Abhishek pandey

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