Indian Stock Market 22 May 2026: शुक्रवार, 22 मई को शेयर बाजार बिल्कुल सामान्य खुला और इसमें केवल थोड़ी सी बढ़त देखी गई. वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव थोड़ा कम होने से इन्वेस्टर्स को राहत मिली है. सुबह शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 178.30 अंक (0.24%) की बढ़त के साथ 75,361.66 पर और NSE निफ्टी 50 अंक (0.20%) मजबूत होकर 23,702.85 पर कारोबार कर रहा था.
बाजार में तेजी की क्या है मुख्य वजह?
ग्लोबल मार्केट में आई मजबूती और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध टलने की उम्मीदों ने बाजार को सहारा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालकर आर्बिट्रेशन को मौका देने की बात कही है. हालांकि, ईरान ने अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) देश से बाहर भेजने की अमेरिकी मांग को खारिज कर दिया है, लेकिन 7 अप्रैल के कमजोर सीजफायर के बाद से कोई बड़ा सैन्य टकराव न होने से इन्वेस्टर्स ने राहत की सांस ली है. इसके अलावा, एशिया के अन्य बाजारों जैसे जापान के निक्केई (2.61% ऊपर) और हांगकांग के हैंगसेंग (1.34% ऊपर) में भी शानदार तेजी देखी गई.
विदेशी और घरेलू इन्वेस्टर्स का क्या है रुख?
भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत इन्वेस्टर्स (FIIs/FPIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं. 21 मई को विदेशी इन्वेस्टर्स ने 1,891.21 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत इन्वेस्टर्स (DIIs) ने बाजार को पूरा सपोर्ट दिया और 2,492.42 करोड़ रुपये की खरीदारी की. बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, विदेशी इन्वेस्टर्स की यह बिकवाली मई के अंत तक जारी रह सकती है, इसलिए अगले हफ्ते होने वाली मंथली डेरिवेटिव एक्सपायरी (F&O expiry) को देखते हुए इन्वेस्टर्स को सावधानी बरतनी चाहिए.
कच्चे तेल और रुपये की क्या है स्थिति?
वैश्विक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.54% बढ़कर 104.16 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 1.09% की बढ़त के साथ 97.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सोना 0.31% गिरकर 4,528.87 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 0.06% की मजबूती के साथ 96.23 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
लॉन्ग टर्म में भारत के लिए क्या है अच्छी खबर?
अबू धाबी ने एक नई तेल पाइपलाइन का लगभग 50% काम पूरा कर लिया है, जो 2027 तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसकी निर्भरता को कम कर देगी. यूएई के साथ अच्छे रणनीतिक संबंधों और खाड़ी देशों से भारतीय रिफाइनरियों की नजदीकी के कारण, भविष्य में यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित होगा.
ये भी पढ़ें: ईरान के एक फैसले ने बिगाड़ा खेल, फिर महंगा हुआ कच्चा तेल
