₹10 से ₹500 के नोट में छिपा है ये राज, वजह जानकर कहेंगे- अरे, ये तो पता ही नहीं था

Indian Rupee Note: रोज 10-20 रुपये का नोट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या कभी उसके सबसे छोटे और सबसे खास सिक्योरिटी फीचर पर नजर गई? जानिए माइक्रो-लेटरिंग क्या है और यह नकली नोट पकड़ने में कैसे मदद करती है.

Indian Rupee Note: अगर अभी आपके पर्स में 10 रुपये, 20 रुपये, 100 रुपये या 500 रुपये का कोई नोट है, तो उसे एक बार निकालकर ध्यान से देखिए. पहली नजर में आपको वही गांधी जी की तस्वीर, नंबर और रंग दिखाई देंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी नोट पर एक ऐसी चीज भी छिपी होती है, जिसे ज्यादातर लोग कभी नोटिस ही नहीं करते?

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर भारतीय नोट पर माइक्रो-लेटरिंग (Micro-lettering) नाम की एक खास सुरक्षा तकनीक देता है. ये इतने छोटे-छोटे अक्षर होते हैं कि सामान्य आंखों से इन्हें पढ़ पाना लगभग नामुमकिन है. इन्हें देखने के लिए मैग्निफाइंग ग्लास या माइक्रोस्कोप की जरूरत पड़ती है. यही छोटी-सी चीज नकली नोटों की पहचान करने में बड़ी भूमिका निभाती है.

आखिर नोट पर क्या छिपा होता है?

माइक्रो-लेटरिंग का मतलब है कि नोट पर बेहद छोटे आकार में कुछ खास शब्द और नंबर छापे जाते हैं. इनमें आमतौर पर ये चीजें शामिल होती हैं—

  • RBI
  • नोट की वैल्यू (10, 20, 50, 100, 200 या 500)
  • India
  • भारत (देवनागरी में)
  • RBI100INDIA या RBI500INDIA जैसे टेक्स्ट

इन अक्षरों को इतनी बारीकी से प्रिंट किया जाता है कि नकली नोट बनाने वालों के लिए इन्हें हूबहू कॉपी करना आसान नहीं होता.

अगर ढूंढना चाहें तो ये कहां मिलेंगे?

अगर आपके पास मैग्निफाइंग ग्लास है, तो नोट पर इन जगहों पर माइक्रो-लेटरिंग देख सकते हैं.

जगहक्या लिखा होता है?
गांधी जी के चश्मे के दाईं ओरभारत (देवनागरी में)
गांधी जी की तस्वीर के बाईं तरफRBI और नोट की वैल्यू, जैसे 100 RBI या 500 RBI
गांधी जी की शॉल के पासIndia और भारत
नोट के बाईं ओर डिजाइन मेंRBI100INDIA, RBI500INDIA जैसे टेक्स्ट

यह पैटर्न 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 200 रुपये और 500 रुपये के नोटों में मिलता है. फर्क सिर्फ नोट की वैल्यू का होता है.

RBI ने इतने छोटे अक्षर क्यों छापे हैं?

इसका सीधा कारण है नकली नोटों पर लगाम लगाना. माइक्रो-लेटरिंग एक ऐसा सिक्योरिटी फीचर है, जिसे बिल्कुल सही तरीके से दोहराना आसान नहीं होता. अगर कोई नोट नकली होता है, तो अक्सर ये छोटे अक्षर साफ नहीं दिखते या सही तरह से प्रिंट नहीं होते.

यही वजह है कि बैंक, कैश संभालने वाले कर्मचारी और कई कारोबारी नोट की जांच के दौरान इस फीचर को भी देखते हैं. इसके अलावा RBI नोटों में वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, लैटेंट इमेज, इंटैग्लियो प्रिंटिंग और ऑप्टिकली वैरिएबल इंक जैसी कई सुरक्षा तकनीकों का भी इस्तेमाल करता है.

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By Soumya shahdeo

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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