Indian Passport Citizenship Proof: विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को एक जरूरी क्लैरिफिकेशन देते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट सिटिजनशिप सर्टिफिकेट नहीं है. यह एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, जिसे भारत सरकार इंटरनेशनल ट्रैवल को आसान बनाने के लिए जारी करती है. यह जानकारी 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर दी गई.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट विदेशों में किसी व्यक्ति की भारतीय राष्ट्रीयता को दर्शाता है, लेकिन हर कानूनी स्थिति में इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता.
पासपोर्ट और नागरिकता में क्या अंतर है?
बहुत से लोग मानते हैं कि पासपोर्ट होना ही भारतीय नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है. हालांकि, विदेश मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट नागरिकता के आधार पर जारी किया जाता है, लेकिन यह वह डॉक्यूमेंट नहीं है जो नागरिकता प्रदान करता है.
पासपोर्ट जारी करने से पहले कई डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाती है, जैसे:
- बर्थ सर्टिफिकेट
- आधार कार्ड
- ऐकेडमिक डॉक्यूमेंट्स
- अन्य सरकारी डॉक्यूमेंट्स
इन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर नागरिकता की पात्रता का आकलन किया जाता है और फिर पासपोर्ट जारी किया जाता है.
नागरिकता का फैसला कैसे होता है?
भारत में नागरिकता का तय करना नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है. इस कानून के अनुसार नागरिकता कई आधारों पर मिल सकती है:
- जन्म के आधार पर
- वंश (Descent) के आधार पर
- पंजीकरण के माध्यम से
- प्राकृतिककरण (Naturalisation) के जरिए
विशेष रूप से 1987 और 2004 के बाद किए गए संशोधनों के तहत जन्म और माता-पिता से जुड़ी जानकारी नागरिकता तय करने में अहम भूमिका निभाती है.
क्या आधार और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण हैं?
इस मुद्दे पर भी स्थिति साफ की गई है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि आधार कार्ड केवल प्रूफ ऑफ आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का प्रमाण नहीं. इसी तरह वोटर आईडी भी मुख्य रूप से व्यक्ति की पहचान, उम्र और निवास संबंधी जानकारी को दर्शाती है. इसे भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता.
कौन सा डॉक्यूमेंट क्या साबित करता है?
| डॉक्यूमेंट | मुख्य उद्देश्य |
| पासपोर्ट | इंटरनेशनल ट्रैवल और राष्ट्रीयता का प्रदर्शन |
| आधार कार्ड | पहचान का प्रमाण |
| वोटर आईडी | मतदान और पहचान |
| जन्म प्रमाण पत्र | जन्म संबंधी जानकारी |
| नागरिकता अधिनियम के तहत रिकॉर्ड | नागरिकता तय करने का आधार |
सरकार ने यह क्लैरिफिकेशन क्यों दिया?
विदेश मंत्रालय का यह क्लैरिफिकेशन ऐसे समय में आया है जब नागरिकता और पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट्स को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां देखने को मिलती हैं. मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि हर भारतीय पासपोर्ट भारत सरकार की संपत्ति होता है और कानून के तहत जरूरत पड़ने पर इसे वापस लिया जा सकता है.
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