भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग गढ़, वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने तेज किया प्रयास

कोरोना वायरस के कारण कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां चीन छोड़कर नये ठिकाने की तलाश कर रही हैं. इनमें से कई कंपनियां भारत में अपना संयंत्र लगाने की इच्छुक है और इसके लिए वे सरकार से संपर्क में भी हैं.

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस के कारण कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां चीन छोड़कर नये ठिकाने की तलाश कर रही हैं. इनमें से कई कंपनियां भारत में अपना संयंत्र लगाने की इच्छुक है और इसके लिए वे सरकार से संपर्क में भी हैं. भारत इस मौके को गंवाना नहीं चाहता. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय उस सेक्टर की पहचान करने में जुटा है, जिसमें भारत को मैन्युफैक्चरिंग का गढ़ बनाया जा सके. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इसके लिए पूंजीगत सामान, चमड़ा और रसायन जैसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों की संभावनाओं की पहचान कर रही है.

सूत्रों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने तथा देश को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का गढ़ बनाने की क्षमता है, उनकी पहचान करने के लिए उद्योग मंडलों सहित विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ कई बैठकें हो चुकी हैं.12 सेक्टर्स पर दिया जा रहा ध्यानएक सूत्र ने बताया, 12 ऐसे अग्रणी क्षेत्र हैं, जिन पर ध्यान दिया जा सकता है. इनमें मॉड्यूलर फर्नीचर, खिलौने, खाद्य प्रसंस्करण (जैसे रेडी टू ईट फूड), कृषि-रसायन, वस्त्र (जैसे मानव निर्मित सूत), एयर कंडीशनर, पूंजीगत सामान, दवा और वाहन कल-पुर्जा शामिल हैं.

ग्लोबल सप्लाई चेन में होगा व्यापक बदलावभारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) और एसोचैम जैसे उद्योग मंडलों के प्रतिनिधियों समेत अन्य लोगों को मिलाकर इस मामले पर समूह और उप-समूह गठित किये गये हैं. सूत्रों ने कहा कि मुख्य समूह तकनीकी क्षमता, रोजगार क्षमता और वैश्विक व घरेलू मांग जैसे मुद्दों के आधार पर क्रियान्वयित किये जाने योग्य नीतियों की पहचान करेगा. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि कोरोना वायरस महामारी के बाद के युग में ग्लोबल सप्लाई चेन में एक व्यापक बदलाव होने जा रहा है, और भारतीय उद्योगपतियों तथा निर्यातकों को ऐसे में विश्व व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी पर काबिज होने के प्रयास करने चाहिए.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी में है 15 फीसदी योगदानवाणिज्य और उद्योग मंत्री ने यह भी बताया था कि मंत्रालय ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने के ऊपर काम कर रहा है, जिन्हें निर्यात के उद्देश्य से निकट भविष्य में बढ़ावा दिया जा सकता है. मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से भारत के धीमे पड़ते निर्यात को तेज करने तथा रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने में मदद मिल सकती है. उल्लेखनीय है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का करीब 15 प्रतिशत योगदान है. भारत सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जीडीपी में हिस्सेदारी को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है.

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Author: Pritish Sahay

Published by: Prabhat Khabar

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