Economic Survey Insights: आजकल डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत को लेकर काफी चर्चा है. लेकिन भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने साफ किया है कि अगर हमें रुपये को लंबे समय तक मजबूत रखना है, तो हमें अपने देश में फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यानी ‘चीजें बनाने की क्षमता’ को बढ़ाना होगा.
फैक्ट्रियां लगेंगी, तभी रुपया मजबूत होगा
CEA का मानना है कि किसी भी देश की करेंसी की असली ताकत वहां के उद्योगों (Industries) में होती है. जब हम अपने देश में सामान बनाकर विदेशों में बेचेंगे (एक्सपोर्ट करेंगे), तो विदेशी पैसा भारत आएगा. इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा और दुनिया का भरोसा रुपये पर मजबूत होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ‘सर्विस सेक्टर’ (जैसे IT) अच्छा है, लेकिन वह मैन्युफैक्चरिंग की जगह नहीं ले सकता.
रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. इस पर CEA ने समझाया कि यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं है. दुनिया भर के उभरते देशों (जैसे ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) की करेंसी भी गिर रही है. सच तो यह है कि 2020 के बाद से आई वैश्विक मुश्किलों के बावजूद, भारत का रुपया बाकी देशों के मुकाबले काफी हद तक स्थिर रहा है.
भारत की आर्थिक ढाल है तैयार
- पिछले 10 सालों में भारत ने अपनी बाहरी आर्थिक स्थिति को बहुत मजबूत कर लिया है.
- बड़ा खजाना: हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 2015 के 341.6 अरब डॉलर से बढ़कर अब 701.4 अरब डॉलर (जनवरी 2026 तक) हो गया है.
- इंपोर्ट कवर: हमारे पास इतना पैसा है कि हम 11 महीने से ज्यादा का आयात (Import) आसानी से कर सकते हैं, जबकि 10 साल पहले यह क्षमता सिर्फ 9 महीने की थी.
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