India-EU Trade Deal: भारत और यूरोप के देशों (EU) के बीच एक खास व्यापार समझौता (FTA) हुआ है. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो विदेशी वाइन, जैतून का तेल (Olive Oil) या यूरोप की बनी चॉकलेट और ब्रेड पसंद करते हैं. सरकार इन चीजों पर लगने वाला भारी टैक्स (Import Duty) घटाने जा रही है.
इन उत्पादों के गिरेंगे दाम
यूरोपीय संघ की फैक्टशीट बताती है कि भारत उन उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने के लिए तैयार है, जो अब तक आम भारतीयों की पहुंच से महंगे टैक्स के कारण दूर थे.
- अब तक यूरोपीय वाइन पर 150% टैक्स वसूला जाता था, जिसे अब तत्काल प्रभाव से आधा यानी 75% कर दिया जाएगा. भविष्य में इसे 20% के न्यूनतम स्तर तक ले जाने की योजना है.
- जैतून के तेल पर लगने वाली 45% ड्यूटी को अगले 5 वर्षों के भीतर शून्य (0%) कर दिया जाएगा.
- ब्रेड और चॉकलेट जैसे प्रोसेस्ड उत्पादों पर अब तक 50% तक टैक्स लगता था, जिसमें भारी कटौती की जाएगी.
इस ट्रेड डील का सबसे आकर्षक हिस्सा मोटर गाड़ियों पर लगने वाला टैरिफ है. अब विदेशी लग्जरी कारें भारत में पहले के मुकाबले काफी किफायती दरों पर उपलब्ध होंगी:
- अब तक जो लग्जरी कारें 110% इंपोर्ट ड्यूटी के कारण आम पहुंच से बाहर थीं, उन पर टैक्स घटाकर मात्र 10% कर दिया गया है.
- इस विशेष छूट का लाभ सालाना 2.5 लाख गाड़ियों तक ही सीमित रहेगा, ताकि घरेलू निर्माताओं का संतुलन बना रहे.
मशीनरी और केमिकल सेक्टर पर बड़े फैसले:
- व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मशीनों पर लगने वाले 44% तक के भारी टैक्स को अब लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.
- औद्योगिक कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स पर अब तक 22% तक ड्यूटी लगती थी, जिसे अब ज्यादातर उत्पादों पर समाप्त कर दिया गया है.
- स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बनाने के लिए दवाओं पर लगने वाले 11% टैक्स को पूरी तरह हटा दिया गया है, जिससे विदेशी दवाएं अब कम कीमत पर मिलेंगी.
घरेलू खेती पर कोई आंच नहीं
सरकार ने इस सौदेबाजी में भारतीय किसानों के हितों का विशेष ख्याल रखा है. करोड़ों लोगों की आजीविका(Livelihood) से जुड़े उत्पादों को नेगेटिव लिस्ट में रखा गया है, यानी उन पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी:
- चावल और चीनी के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी.
- चिकन मीट और बीफ जैसे उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह दूर रखा गया है.
- इन क्षेत्रों को खोलने से स्थानीय कीमतों में भारी गिरावट और किसानों को नुकसान होने का खतरा था.
क्वालिटी और पहचान की सुरक्षा (GI Tagging)
सस्ते सामान का मतलब खराब गुणवत्ता नहीं होगा. यूरोपीय मानकों (Health & Safety) का पालन अनिवार्य रहेगा. इसके अलावा, जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) पर चल रही बातचीत यह सुनिश्चित करेगी कि केवल असली यूरोपीय उत्पाद ही भारतीय बाजार में बिकें, जिससे नकली ब्रांड्स पर लगाम लगेगी.
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