India-EU Trade Agreement: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हुई नई ट्रेड डील ने ग्लोबल मार्केट की हलचल बढ़ा दी है. आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे एक ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए कहा कि यह एग्रीमेंट दुनिया के वन-थर्ड बिजनेस को कंट्रोल करेगा और ग्लोबल जीडीपी में 25 पर्सेन्ट का योगदान देगा. यह डील सिर्फ बिजनेस के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत के उन युवाओं के लिए है जो एआई (AI) और सेमीकंडक्टर्स जैसे फ्यूचर सेक्टर्स में अपना करियर देख रहे हैं. इस एग्रीमेंट के जरिए भारत की इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग को वो ग्लोबल स्टेज मिलेगा, जिसका सपना हम सालों से देख रहे थे.
यूरोपीय बाजार में भारतीय सामान को क्या छूट मिलेगी?
इस डील की सबसे बड़ी खबर यह है कि यूरोप अब भारत के 9425 तरह के सामानों पर कोई टैक्स (टैरिफ) नहीं लगाएगा. इससे भारत को लगभग 75 बिलियन डॉलर का सीधा फायदा होगा. हमारा लक्ष्य इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है और 2 ट्रिलियन डॉलर के विशाल यूरोपीय बाजार में बिना टैक्स की एंट्री इस सपने को हकीकत में बदल देगी. इसका मतलब है कि हमारे छोटे फैक्ट्री और स्टार्टअप्स अब सीधे यूरोप की कंपनियों को टक्कर दे पाएंगे और ग्लोबल सप्लाई चेन का एक मजबूत हिस्सा बनेंगे.
क्या एआई और नई टेक्नोलॉजी में भारत को मदद मिलेगी?
जी हां, मंत्री वैष्णव ने साफ किया कि इस पार्टनरशिप का मुख्य बेस एआई, क्लीन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर्स जैसे मॉडर्न सब्जेक्ट हैं. इसके तहत दोनों देश मिलकर रिसर्च करेंगे और टेक्नोलॉजी शेयर करेंगे. इससे भारत के टेक स्टार्टअप्स को न सिर्फ फंडिंग बल्कि यूरोप की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का भी साथ मिलेगा. यह डील हमारे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को इतना ताकतवर बना देगी कि भारतीय कंपनियां दुनिया के सबसे बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स आसानी से जीत सकेंगी.
हमारे आइडियाज और टैलेंट की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
जब बात नॉलेज और इन्वेंशन की आती है, तो यह डील किसी ढाल की तरह काम करेगी. इसमें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं ताकि किसी का आइडिया चोरी न हो. साथ ही, भारत की ‘ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी ‘ (TKDL) को भी खास पहचान दी गई है. भारत को अपने पेटेंट सिस्टम को सुधारने के लिए स्पेशल टेक्निकल मदद मिलेगी, जिससे हमारे इनोवेटर्स को अपनी खोज का पूरा क्रेडिट और पैसा मिल सके. यह एग्रीमेंट सही मायने में भारत की ‘नॉलेज इकॉनमी’ को ग्लोबल लेवल पर सुरक्षित और मशहूर बनाने वाला है.
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