IDBI Bank Share Price: सोमवार की सुबह IDBI Bank के शेयरहोल्डर्स के लिए काफी भारी रही है. जैसे ही बाजार खुला, बैंक के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई. देखते ही देखते शेयर 13.55% तक टूटकर 79.69 रुपये पर आ गया. पिछले कारोबारी दिन (शुक्रवार) को यह 92.20 रुपये पर बंद हुआ था. इस अचानक आई गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा बैंक की बिक्री यानी निजीकरण (Disinvestment) को रोकने का फैसला है.
क्यों रुक गई IDBI Bank के बिकने की प्रक्रिया?
सरकार और LIC मिलकर इस बैंक में अपनी करीब 60.72% हिस्सेदारी बेचना चाहते थे. इसके लिए कनाडा की कंपनी ‘फेयरफैक्स’ और दुबई के ‘एमिरेट्स NBD’ जैसे बड़े निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई थी और अपनी बोलियां भी लगाई थीं. लेकिन पेंच यहां फंसा कि इन निवेशकों ने जो कीमत (Bid) लगाई, वह सरकार की उम्मीद से काफी कम थी. सरकार ने एक रिजर्व प्राइस (न्यूनतम तय कीमत) रखा था, और बोलियां उससे नीचे थीं. सीधी बात यह है कि सरकार कम दाम पर बैंक को बेचने को तैयार नहीं है, इसलिए फिलहाल इस प्रोसेस को रोक दिया गया है.
सरकार और LIC का असली प्लान क्या था?
इस पूरी योजना के तहत भारत सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थे. उम्मीद थी कि इस मेगा डील से सरकार के खजाने में 66,000 करोड़ रुपये से 72,000 करोड़ रुपये तक आयेंगे. यह भारतीय बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा निजीकरण होने वाला था. लेकिन ईरान और इजराइल के बीच चल रहे तनाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता की वजह से पहले ही इसमें देरी हो रही थी, और अब कम बोली ने इस पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है.
अब निवेशकों और बैंक का आगे क्या होगा?
भले ही शेयर बाजार में आज हलचल है, लेकिन बैंक की अंदरूनी हालत अब पहले से काफी बेहतर है. पिछले कुछ सालों में IDBI Bank घाटे से उबरकर मुनाफे में आया है और इसके फंसे हुए कर्ज (NPA) में भी बड़ी कमी आई है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इरादा नहीं बदला है, बल्कि सही समय का इंतजार कर रही है. जब बाजार के हालात सुधरेंगे और खरीदार सही कीमत देने को तैयार होंगे, तब फिर से नए सिरे से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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